फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mau News: हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल गोठा की रामलीला

विज्ञापन
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है गोठा की रामलीला।फाइल फोटो
विज्ञापन
ब्लॉक क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम सभा गोठा की रामलीला हिदू-मुस्लिम एकता की न सिर्फ मिसाल है, बल्कि आपसी भाईचारे का संदेश भी देती है। मुस्लिम समाज के लोग रामलीला में बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं और रामलीला में पात्र बनकर अपने आप को भाग्यशाली समझते हैं।
विज्ञापन

गोठा की रामलीला लगभग चार सौ वर्ष पूर्व शुरू हुई थी। गोठा की रामलीला रामनगर की तर्ज पर दिन में खेली जाती है। हिंदू -मुस्लिम एक साथ मिलकर रामलीला का आयोजन करते हैं। वहीं हिंदू समुदाय के लोग उसी तरह मोहर्रम में भी साथ देते हैं। त्योहार पर लगने वाले चंदे में दोनों वर्ग के लोग सहयोग करते हैं।
रामलीला समिति के अध्यक्ष अजय उपाध्याय ने बताया कि चार सौ वर्ष पूर्व गांव के संभ्रांत लोगो के सहयोग से एक छोटे से स्थान पर रामलीला आरंभ हुई थी, जो चलती आ रही है। उन्होंने बताया कि 11 अक्तूबर को मुकुट पूजन से रामलीला की शुरूआत होगी। इसमें 12 अक्तूबर को रामवन गमन का मंचन होगा। यह रामलीला भवन से हनुमान गढ़ी तक होहा। 13 अक्तूबर को हनुमान गढ़ी से चित्रकूट पर्वत फरसरा खुर्द तक तथा 14 अक्तूबर को भरत मनावन कार्यक्रम है। 24 अक्तूबर को रामलीला भवन पर रात्रि 8 बजे रामराज्यभिषेक कार्यक्रम और 25 अक्तूबर को रामलीला भवन से ही महाराणा प्रताप के ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया जाएगा।
विज्ञापन

17 के राम, 16 के लक्ष्मण, 15 के भरत और 14 के शत्रुघ्न
दोहरीघाट/कुसुम्हा। क्षेत्र के गोठा की रामलीला की परंपरा पुरानी है। यहां की रामलीला में राम, सीता लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का पात्र किशोर ही अदा करते हैं। इस बार की रामलीला में 17 साल के अम्बिक मिश्रा राम बनेगे। 16 साल के रामप्रवेश पांडेय रामलीला में लक्ष्मण की भूमिका में होंगे। 15 साल के हिमांशु रामलीला में भरत की भूमिका में होंगे। 14 वर्ष के शिवम इसमें शत्रुघ्न की भूमिका निभाएंगे। मनोज मद्धेशिया, हनुमान की भूमिका में होंगे तो अभिंदन उपाध्याय, सीता की भूमिका में होंगे। रामलीला आकर्षक मंचन के लिए एक महीने से रिहर्सल भी चल रहा है। रामलीला के संवाद में आज भी कलम से लिखी हुई एक बहुत पुरानी किताब का ही सहारा लिया जाता है। रामलीला में आचार्य की भूमिका निभाने वाले संजय उपाध्याय के मुताबिक यह किताब दो सौ वर्ष से अधिक पुरानी है। रामलीला में बाल रूप को ही राम, सीता लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न बनाया जाता है।
एतिहासिक होता है भरत मनावन
रामलीला में भरत मनावन कार्यक्रम भव्य तरीके से किया जाता है, इसमें हाथी, घोड़े, ऊंट के साथ भरत अपने बड़े भाई राम को मनाने चित्रकूट पर्वत यानी फरसरा खुर्द पहुंचते हैं। जहां से भरत जी खड़ाऊ लेकर लौटते है। वहीं दशहरे पर रामलीला कमेटी की ओर से रावण वध लीला का मंचन किया जाता है।
रामलीला के मंचन तक लहसुन-प्याज नहीं खाते
नवरात्र में शुरू होने वाली रामलीला के लिए कलाकारों के द्वारा रिहर्सल किया जा रहा है। यह रिहर्सल रात में आठ बजे से शुरू होकर बारह बजे तक चलता है। युवा कलाकारों की जगह किशोरों ने ले ली है। रामलीला की शुरुआत से लेकर समापन तक राम, लक्ष्मण, सीता और अन्य कलाकारों की भूमिका निभाने वाले लोग लहसुन-प्याज का सेवन नहीं करते है। इस दौरान भक्त इन किशोरों को अपने घर भोजन कराते हैं और आरती लेते हैं। किशोरों ने बताया कि राम के चरित्र को आत्मसात करने के लिए वे नवरात्र में पूरी तरह से शाकाहारी रहते हैं। रामलीला के दौरान वे लहसुन और प्याज से बने खाने का भी त्याग कर देते हैं।
रामलीला में बसते हैं प्राण : काले खां
काले खां, मंसूर अली दोनों भाई का रामलीला में हास्य अभिनय सिर चढ़कर बोलता है। सलमान खां की गर्जना लोगो के आकर्षण का केंद्र रहती है। काले खां कहते है कि रामलीला में मेरे प्राण बसते हैं। इसके बिना जीवन अधूरा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें