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कंट्रोल रूम से अच्छी खबर, कम बज रही घंटी:

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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप कम होता नजर आ रहा है। जिला प्रशासन की तरफ से लोगों की सहायता के लिए बनाए गए कोविड कंट्रोल रूम की घंटी कम बज रही है। आंकड़ों के अनुसार 15 दिन पहले जहां रोजाना 24 से 25 काल आती थी। अब चार से पांच काल आ रही है।
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जिले में कोरोना संक्रमण का ग्राफ तेजी से बढ़ने के चलते कोविड अस्पतालों में न तो लोगों को बेड मिल पा रहा था। न ही ऑक्सीजन उपलब्ध हो रही थी। जागरूकता के अभाव मेें तमाम लोगों को अस्पतालों के चक्कर काटना पड़ा। इसी बीच कई लोगों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। नान कोविड मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन की तरफ से कोविड मरीजों की सहायता के लिए कोविड कंट्रोल रूम की स्थापना की गई। 24 घंटे सहायता देने की व्यवस्था दी गई।
कंट्रोल रूम के आंकड़ों के अनुसार पिछले 15 दिनों में कंट्रोल रूम में प्रतिदिन करीब 25 काल आती थी। जिसमें ज्यादातर संख्या में लोग अस्पताल में बेड की मांग आ रही थी। इसके बाद आक्सीजन कहां मिलेगी। लेकिन वर्तमान स्थिति में चार से पांच काल आ रही है। अब अस्पतालों में बेड भी खाली पड़े हैं। आक्सीजन की भी उपलब्धता है। कंट्रोल रुम में दर्ज विवरण के अनुसार 15 दिन पूर्व होम आइसोलेशन में रह रही एक महिला की तबियत बिगड़ने पर डायरेक्ट एल थ्री पीजीआई आजमगढ़ चले गए। वहां के स्टाफ ने भर्ती लेने से मना कर दिया। परेशान मरीज के परिवारजनों ने मऊ के मेन कोविड कंट्रोल रूम से संपर्क किया। कंट्रोल रुम के प्रभारी ने प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर भर्ती कराया। अब महिला स्वस्थ होकर घर लौट आई है। कोविड कंट्रोल रुम के प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया कि 15 दिन पूर्व जहां 24 से 25 काल आ रही थी। अब चार से पांच काल आ रही है।
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