मऊ। घोसी चीनी मिल चार दिसंबर को डोंगा पूजा के बाद दूसरे दिन से पूरी क्षमता के साथ निर्बाध रूप से चलेगी। देवरिया, गोरखपुर जिले का गन्ना सीधे घोसी चीनी मिल गेट पर पहुंचाया जाएगा। मिल चालू होने से अब जिले के आसपास के गन्ना किसानों को न सिर्फ लाभ होगा, बल्कि उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। घोसी चीनी मिल की पेराई क्षमता 2500 टीसीडी है। चीनी मिल के परिक्षेत्र में 1,462 गांव आते हैं, इसमें चार समितियों से गन्ना की खरीद की जाती है।
घोसी, बलिया की रसड़ा चीनी मिल, देवरिया की बरहज व गोरखपुर की धुरियापार चीनी मिल समिति शामिल है। मिल को गन्ना की आपूर्ति करने वाले किसानों की संख्या 13,564 है। वर्ष 2026-27 में इस चीनी मिल को 15 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य शासन से निर्धारित किया गया है। अभी मिल संचालन में एक माह से अधिक का समय है। कई वर्ष से घोसी चीनी मिल घाटे में चल रही थी, इसे देखते हुए प्रबंधन ने 21 फरवरी 2026 के बाद घोसी चीनी मिल में गन्ने की पेराई बंद कर उसे सठियांव चीनी मिल से अटैच कर दिया था। साथ ही मिल गेट, दुबारी प्रथम, द्वितीय, गजियापुर, सूरजपुर प्रथम, द्वितीय, चंद्रापार क्रय केंद्र के साथ ही अराजी देवारा करखिया, लाटघाट, खोजौली चीनी मिल से अटैच कर दिया गया।
बलिया का रसड़ा, गोरखपुर का धुरियापार, देवरिया का बरहज गन्ना क्रय केंद्र घोसी चीनी मिल से खत्म कर दिया गया था। इन सभी क्रय केंद्रों को बहाल कर दिया गया है। बलिया जिले के रसड़ा चीनी मिल का गन्ना रसड़ा, मनियर, सिलौनी, रतनपुरा क्रय केंद्र पर किसान पहुंचाएंगे। आजमगढ़ के सठियांव चीनी मिल से अटैच रहने से गन्ना डुलाई का भार बढ़ता और आमदनी घट जाती थी। ऐसे में घोसी मिल के संचालन से किसान खुश हैं। मिल का आधुनिकीकरण के बाद अब किसानों का गन्ना उत्पादन की तरफ तेजी से रुझान बढ़ेगा और इसका क्षेत्रफल भी बढ़ेगा।
इस बाबत जिला गन्ना अधिकारी एके पांडेय का कहना है कि घोसी चीनी मिल पूरी क्षमता के साथ चलाई जाएगी। देवरिया की बरहज समिति और गोरखपुर की धुरियापार चीनी मिल समिति का गन्ना मिल गेट पर मंगाया जाएगा। चीनी मिल चालू होने से दोनों जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा।