घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान की तरफ बढ़ने लगा है। जिससे तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें तेज होती जा रही है। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 45 सेमी वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्राचीन धरोहरों पर खतरा मंडराने लगा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से बाढ़ से बचाव के लिए उपाय नहीं हो रहे हैं। अब खतरे का निशान एक मीटर से भी कम रह गया है।
घाघरा के जलस्तर पर नजर डालें तो 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर 45 सेमी वृद्धि दर्ज की गई है। नदी का जलस्तर 69.15 मीटर पहुंच गया। जबकि शनिवार को जलस्तर 68.70 मीटर था। गौरीशंकर घाट पर खतरा निशान 69.90 मीटर है। पिछले 24 घंटे में 45 सेमी जलस्तर बढ़ा है। जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहा तो नदी का पानी दो दिन में खतरा बिंदु पार कर सकता है। नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, पीडब्ल्यूडी का डाकबंगला ,शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर डीह बाबा का मंदिर आदि पर खतरा मंडरा रहा है। घाघरा का जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से बंधों पर पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है। घाघरा के उग्र तेवर से किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है। वहीं आम लोगों को बाढ़ आने से बेघर होने की चिंता खाए जा रही है।नदी के कहर बरपाने की आशंका से तटवर्ती इलाके के लोग चैन से सो नहीं पा रहे हैं।