घाघरा में उफान आने का क्रम जारी रहने से तटवर्ती क्षेत्र के लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। सूरजपुर क्षेत्र के आश्रम में नदी के कटान करने से प्राचीन धरोहर के विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है। नदी के रुख से किसान परेशान दिख रहे हैं।
नदी के जलस्तर पर नजर डाली जाए तो शनिवार को नदी के जलस्तर में 10 सेमी. की वृद्धि दर्ज की गई। नदी का जलस्तर 69.30 मीटर पहुंच गया है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 69.20 मीटर था। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर आका गया है।नदी गोरखपुर क्षेत्र के देवारा में कटान कर रही है। इससे कटान पीड़ित किसानों में आशा की किरण जगी है।
किसानों का कहना है कि नदी की धारा में बदलाव जारी रहा तो नदी में विलीन हुई उपजाऊं जमीन वापस मिल सकती है। वहीं नदी के उग्र रूप धारण करने से आश्रम के पास कटान शुरू हो गई है। इससे सूरजपुर क्षेत्र के तटवर्ती गांवों के लोग दहशत मेें हैं।
सूरजपुर में प्राचीन धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लोगों ने कटान रोकने की मांग की है। उधर मधुबन के देवारा क्षेत्र में भी घाघरा का जलस्तर बढ़ने लगा है। नदी छह सेमी की रफ्तार से बढ़ रही है। घाघरा का जलस्तर 64.62मीटर तक पहुंच गया है।जबकि हाहा नाला पर खतरे का निशान 66.31 मीटर आंका गया है। नालों में पानी पहुंचने लगा है। किसान खेतों में पानी आने की आस लगाए हुए हैं।