जिले में बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। प्रतिवर्ष घाघरा में बाढ़ से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन होती है। जलजमाव से हजारों हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद होती है। बाढ़ से बचाव पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुका है। बावजूद समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। विभागीय अधिकारी कटान रोकने के लिए 2168.56 लाख का प्रोजेक्ट पूरा कर कटान रुक जाने का दावा कर रहे हैं।
बरसात के दिनों में घाघरा प्रतिवर्ष दोहरीघाट तथा मधुबन के देवारा में व्यापक पैमाने पर तबाही मचाती है। दोहरीघाट क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से प्रतिवर्ष हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद होती है। किसानों को मुआवजा के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जाता है। कागजों में कटान रोकने का उपाय तो किया जाता है, लेकिन बाढ़ के समय विभागीय कार्ययोजना दम तोड़ देती है।
अधिकारियों की मानें तो मुक्तिधाम सहित तटवर्ती इलाकों को कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग की ओर गत वर्ष से चल रहा 2168.56 लाख की लागत का 960 मीटर का लांचिंग प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कटान समस्या से निजात मिलेगी। क्षेत्रीय किसानों की मानें तो घाघरा प्रतिवर्ष कहर बरपाती है। इस संबंध में किसान रविंद्र राय, जयप्रकाश राय, धर्मेंद्र यादव, भगवान सिंह, किसान नेता देवप्रकाश राय, लोकदल जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह का कहना है कि घाघरा प्रतिवर्ष दोहरीघाट तथा मधुबन के देवारा में तबाही मचाती है, लेकिन शासन प्रशासन की ओर से बचाव का कार्य कागज पर ही चलता है। कटान तथा जलनिकासी की समस्या का स्थाई समाधान किया जाए।
इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार का कहना है कि 2168.56 लाख की लागत से मुक्तिधाम तक 960 मीटर का लाचिंग प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। इससे कटान समस्या से मिलेगी। बाढ़ खंड आजमगढ़ के अधिशासी अभियंता अजीत कुमार का कहना है कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं। घाघरा में उफान आने पर समस्या नहीं आएगी।