दोहरीघाट। घाघरा जैसे-जैसे खतरा निशान की तरफ बढ़ रही है वैसे-वैसे कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कने बढ़ने लगी है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 20 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी के रौद्र रुप धारण करने से जहां तटवर्ती इलाकों के हजारों एकड़ फसलों के जलमग्न होने का खतरा बढ़ गया है। नदी की प्रलयंकारी लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों से टकरा रही है। इससे कस्बा सहित ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
दोहरीघाट में घाघरा का जलस्तर 20 सेमी की रफ्तार से बढ़ने से लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। एक सप्ताह पूर्व ही घाघरा खतरा बिंदु से 20 सेमी ऊपर चली गई थी। जिससे तटवर्ती इलाकों में नदी का पानी घुसने लगा था, लेकिन फिर तेजी से नदी का जलस्तर घट जाने से लोगो ने राहत की सांस भी नहीं ले पाए थे कि घाघरा के जलस्तर में एक बार फिर उफान आने से लोग परेशान हो गए हैं।
नदी के जलस्तर पर डाला जाए तो मंगनवार को नदी का जलस्तर 69.80 मीटर रहा। जबकि सोमवार को जलस्तर 69.60 मीटर था। खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। नदी खतरा बिंदु से मात्र 10 सेमी नीचे बह रही थी। नदी की प्रलयंकारी लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों से टकरा रही थी। नदी के उग्र रुप धारण करने से मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी लोकनिर्माण विभाग का डाकबंगला, हनुमान मंदिर शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
वहीं तटवर्ती इलाकों बहादुरपुर, रामपुर धनौली, नई बाजार, नवली, सरया, पतनई, ठाकुरगाव, गोधनी, बीवीपुर, ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, ठीकरहिया, रसूलपुर,सूरजपुर सहित तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न होने की चिंता किसानों को खाए जा रही है। किसानों का कहना था कि इस बार फसल डूबी तो फसल बचना मुश्किल होगा।