फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mau News: मिट्टी परीक्षण के महत्व और तरीकों की जानकारी दी

विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वैज्ञानिकों ने सोमवार को रतनपुरा ब्लॉक के एकबालपुर गांव में किसानों को मिट्टी परीक्षण के प्रति जागरूक किया। कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने खेतों में जाकर किसानों को मिट्टी परीक्षण के महत्व और तरीकों की जानकारी दी।
विज्ञापन

रबी फसल की कटाई और खरीफ की बोआई से पहले मिट्टी परीक्षण को बेहद जरूरी बताया गया। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है।
हर दो-तीन वर्ष में एक बार मिट्टी परीक्षण अवश्य कराना चाहिए। इससे खेत की सेहत बनी रहती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद मिट्टी परीक्षण से किसान अपनी अगली फसल को अधिक लाभदायक बना सकते हैं और दीर्घकाल में जमीन की उर्वरता भी बनाए रख सकते हैं। यह एक छोटा कदम है, जो खेती को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनाता है।
विज्ञापन

कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के मृदा वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत देव सिंह ने बताया कि मिट्टी परीक्षण से यह पता लगाया जा सकता है कि खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक आदि पोषक तत्वों की कमी या अधिकता कितनी है। इससे किसानों को यह जानकारी मिलती है कि किस प्रकार और कितनी मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ता है तथा अनावश्यक खर्च भी कम होता है।


ऐसे करें मिट्टी परीक्षण
डॉ. सिंह ने बताया कि गेहूं की कटाई के तुरंत बाद खेत के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 15 इंच गहराई तक मिट्टी के नमूने लें। इन नमूनों को अच्छी तरह मिलाकर सुखा लें और नजदीकी कृषि प्रयोगशाला या मिट्टी परीक्षण केंद्र पर जांच के लिए भेजें। सरकार की ओर से किसानों के लिए कई योजनाएं संचालित हैं, जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, जिसके तहत किसानों को उनकी जमीन की उर्वरता की पूरी जानकारी दी जाती है। इससे किसान संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें