नगर क्षेत्र स्थित तमसा नदी में नाले से जाता शहर का कचड़ा।
नगर में चलने वाला स्लाटर हाउस बिना लाइसेंस के चता है। पालिका ने इसका लाइसेंस नहीं दिया है लेकिन यह काफी दिनों से वैसे ही चल रहा है। दर असल पालिका की ओर से कुछ कसाइयों को उनके घरों में स्लाटरिंग का लाइसेंस दे रखा है लेकिन जानवरों का वध बड़े पैमाने पर नदी के किनारे स्थित स्लाटर हाउस में होता है और जानवरों का मांस यहीं से ट्रालियों में लादकर शहर में सप्लाई किया जाता है।
शहर के पास घनी आबादी के बीच संचालित स्लाटर हाउस को बस्ती से दूर स्थानांतरित करने की मुहिम कुछ हिंदू संगठनों ने छेड़ा था। लगभग साढे चार साल पूर्व स्लाटर हाउस को संशोधित परिवर्धित भी किया गया था लेकिन सब कुछ पूर्ववत ही चलता रहा। इधर स्लाटर हाउस को अन्यत्र हटाने के लिए पालिका ने नदी के उस पार भूमि का चयन भी कर लिया है।
इसके लिए हाल में ही पालिकाध्यक्ष की प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वार्ता भी हो चुकी है।इधर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्लाटर हाउसों को आबादी से दूर रखने के निर्देश दिया है। देखना है पालिका इस संबंध में कितना सार्थक कदम उठा पाती है। पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि अरशद जमाल कहते हैं कि स्लाटर हाउस को शहर से दूर स्थानांतरित करने के विकल्पों पर तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।इसके अतिरिक्त नालों के कचरे को ट्रीटमेंट सिस्टम से संशोधित करनेब के प्रयास किए जाएंगे।