मऊ। जिले में 25 दिसंबर की आधी रात से ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया। अब यह प्रधान आज से भूतपूर्व प्रधान हो गए। जिले के सभी गांवों में विकास संबंधी गतिविधियां संचालित करने की जिम्मेदारी प्रत्येक ब्लाक में केवल एक एडीओ पंचायत में निहित हो गईं। जनपद के सभी नौ ब्लाकों के 671 गांवों के विकास कार्यों के लिए ब्लाक स्तर पर केवल नौ एडीओ पंचायत नियुक्त कर दिए गए हैं।
जिले में कुल 671 ग्राम पंचायतें हैं। इनका कार्यकाल 25 दिसंबर की आधी रात तक था। कोरोना के चलते प्रदेश सरकार ग्राम पंचायतों का चुनाव समय से नहीं करा सकी है। सरकार ने गांवों के प्रधानों का कार्यकाल न बढ़ाकर प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया। 24 दिसंबर की शाम को शासन से इस आशय का आदेश जिलाधिकारी के पास आ गया। इस आदेश में कहा गया है कि 25 दिसंबर की आधी रात के बाद से ही प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। इनके स्थान पर अब नई व्यवस्था के तहत ब्लाक स्तर पर एडीओ पंचायत को प्रशासन नियुक्त करने का आदेश है।
जिलाधिकारी अमित कुमार बंसल ने जिले के नौ ब्लाकों में नौ प्रशासन नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रधानों के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई है। ग्राम निधि का संचालन अब डीएम द्वारा नियुक्त प्रशासक ही करेगा। इसके लिए अलग से पत्र जारी किए जाएंगे। गांवों में ग्राम पंचायतों के सभी छह प्रकार के खातों से अब कोई रकम प्रधान और सेक्रेटरी नहीं निकाल सकेंगे।
इनके द्वारा पूर्व में बैंकों में दिए गए पिछली तिथियों के चेकों का भुगतान भी रोक दिया गया है। यानी अब ग्राम प्रधान ग्राम निधि खातों से किसी प्रकार का लेन देन नहीं कर सकेंगे। बहुत से ग्राम प्रधान ऐसे हैं जो अपने पास से रुपये लगाकर गांवों में विकास कार्य कराए हैं। अब उनके रुपये नहीं मिल सकेंगे। डीपीआरओ घनश्याम सागर कहते हैं कि ब्लाक स्तर पर प्रशासक नियुक्त कर दिए गए हैं। प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गए हैं।
ग्राम प्रधान संगठन करेगा विरोध :
मऊ। सरकारी कर्मचारी को प्रशासन नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के आदेश का पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन विरोध कर रहा है। संगठन के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव कहते हैं कि प्रदेश सरकार ग्राम पंचायतों का चुनाव समय पर न कराकर और सरकारी कर्मचारी को प्रशासक नियुक्त करके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 15वें वित्त का धन पहले ही जारी कर दिया था। लेकिन इस प्रदेश सरकार ने रोक रखा था। ऐसा प्रदेश सरकार ने प्रशासक नियुक्त करके गांवों के विकास के लिए आए धन की लूटपाट करने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भाजपा की रैलियां हो सकती हैं। अन्य प्रांतों में पंचायत चुनाव हो सकते हैं, पर यूपी में पंचायत चुनाव नहीं हो सकते हैं। ऐसा करना प्रदेश सरकार की निरंकुशता है और लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार करना है।
प्रधानों की बैठक आज
कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद आगे की रणनीति बनाने के लिए ग्राम प्रधान संगठन की जिला कार्यकारिणी की बैठक 26 दिसंबर को पालिकाकम्युनिटी हाल में होगी। यह जानकारी जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव ने दी है।