ब्रह्मकुमारी संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा की 46वीं पुण्यतिथि अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में मनाई गई। नगर के सहादतपुरा स्थित संगठन के कार्यालय पर विश्वशांति के लिए प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर विश्व में शांति एवं सद्भावना की मंगल कामना की। साथ ही प्रजापिता ब्रह्मा बाबा को श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर ब्रह्मकुमारी विमला बहन ने कहा कि सन् 1876 में हैदराबाद सिंध में जन्मे ब्रह्मा बाबा के बचपन का नाम दादा लेखराज था।
जब दादा लेखराज 60 वर्ष की आयु के थे तो अचानक ही उनके जीवन में एक महान अलौकिक परिवर्तन आया। उन्हें दिव्यता के साक्षात्कार हुए।
नई सुख शांति से भरपूर दुनिया के निर्माण में जुट जाने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्होंने अपना हीरे जवाहरात का कारोबार समेट कर प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की।
सारी चल अचल संपत्ति इसमें लगा दी। ओम मंडली के नाम से प्रारंभ हुई यह संस्था देश के विभाजन के बाद सन् 1950 में राजस्थान के माउंट आबू में स्थापित हुई।
78 वर्ष पूर्व उनके द्वारा लगाया गया एक नन्हा पौधा आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। पूरे विश्व के 150 देशों में 9500 शाखाएं तथा सेवा केंद्र हैं।
14 लाख लोग इसके नियमित ज्ञान, अध्ययन एवं मेडिटेशन के प्रयोग से अपने जीवन को स्वर्णिम, सुव्यवस्थित व सुसंस्कृति बना रही हैं।
हमें भी ब्रह्मा बाबा द्वारा शुरू किए गए इस महान कार्य में पूरे मनोयोग से जुड़कर स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन का नारा प्रत्यक्ष करते हुए अपने जीवन को भी अनुकरणीय बनाना होगा।
मुहम्मदाबाद गोहना। मुहम्मदाबाद गोहना के फरीदाबाद मुहल्ला स्थित ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखा पर संस्था के संस्थापक ब्रह्मा बाबा की 46वीं पुण्यतिथि विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई गई।
इस अवसर पर केंद्र संचालिका गोमा दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा केवल एक प्रवक्ता ही नहीं अपितु ज्ञान के सागर थे। कार्यक्रम के दौरान विश्व की सुख शांति व समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की गई।