जनपद में गेहूं खरीद के लिए क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी से निपटने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से तैयारी चल रही है। कोटेदारों से बोरे सरेंडर करने को कहा गया है। जनपद में करीब 1021 कोटेदार हैं। ऐसा अनुमान है कि एक माह में करीब 40 हजार बोरे मिल सकते हैं।
इसमें करीब 80 प्रतिशत सही बोरे विभाग की खरीद में काम आ सकते हैं। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध से बोरे का संकट होने के कारण पी-फार्म प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से प्लास्टिक सामग्री बनाने की लागत भी बढ़ गई है। प्लास्टिक के बोरे न मिलने से दूसरे विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
अब जनपद में सभी कोटेदारों से बोरे सरेंडर करने को कहा गया है, जिससे क्रय केंद्रों पर बोरे की उपलब्धता हो और किसानों से गेहूं की खरीद हो सके। जिले में बोरे की पहली बार किल्लत होने के बाद कोटेदारों से बोरे लेकर जूट के बोरे में गेहूं की खरीद की जाएगी।
बोरे की कमी का आलम यह है कि मौसम की मार से बचने के लिए किसान इन दिनों फसल की मड़ाई में लगे हैं। गेहूं की कटाई के बाद किसान गेहूं की बिक्री के लिए क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बोरा नहीं होने से किसान निराश होकर वापस लौट रहे हैं।
किसानों का कहना है कि बोरा नहीं होने से वे बिचौलियों को गेहूं बेचने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि जिनके पास स्टोरेज की क्षमता है, वे सबसे ज्यादा परेशान हैं।
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1.75 लाख क्विंटल लक्ष्य, अभी तक 420 क्विंटल की हुई खरीद
जनपद में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद की शुरुआत की गई है। विभाग की तरफ से इसके लिए करीब 1,75,000 क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। प्रति किलो 25.85 रुपये कीमत तय की गई है। जनपद के अनेक क्षेत्रों में कुल 48 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार छह दिन में 420 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। बोरे की उपलब्धता होने के बाद गेहूं की खरीद में और तेजी आने की संभावना है।
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दोहरी मार से जूझ रहे किसानों के सामने बनी चुनौती
किसानों के सामने इन दिनों गेहूं की फसल को लेकर दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मौसम बना हुआ है। मार्च से लेकर अप्रैल माह तक तीन दिन बूंदाबांदी हो चुकी है। जनपद में अभी भी मौसम खराब बना हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि अभी तीन दिन तक मौसम खराब होने की संभावना है। वहीं दूसरी तरफ आग लगना भी एक प्रमुख समस्या है। जनपद के नौ ब्लॉक में अब तक करीब 40 जगहों पर आग लगने से गेहूं की फसल जलकर राख हो गई है।
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जनपद में कुल 1021 कोटेदार हैं। सभी से बोरे सरेंडर कराने की प्रक्रिया चल रही है। कुल मिलाकर 40 हजार बोरे मिलने का अनुमान है। इसमें सही बोरों से गेहूं खरीद की जाएगी। -राघवेंद्र कुमार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी