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फालोअप शिक्षिका प्रकरण: तत्कालीन अधिकारियों ने नहीं निभाई जिम्मेदारी

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मऊ। फर्जी स्थानांतरण आदेश के माध्यम से जिले में नौकरी हथियाने का ममता राय अथवा रंभा पांडेय का प्रकरण कोई अकेला नहीं है। ममता राय के स्थानांतरण आदेश का सत्यापन तत्कालीन बीएसए ने कराया होता तो यह फर्जीवाड़ा 25 साल पहले ही खुल सकता था। इसके पहले भी कई अध्यापक और कर्मचारी ऐसा हथकंडा अपना कर नौकरी हथियाते रहे हैं। मामला प्रकाश में आने के बाद इन सबको बर्खास्त कर दिया गया। इन सबके नामपते भी फर्जी निकले। बेसिक शिक्षा विभाग में भी यदि गैर जिलों से स्थानांतरित होकर आए अध्यापकों के तबादला आदेश का सत्यापन कराया जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
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बेसिक शिक्षा विभाग की गाइड लाइन के अनुसार यदि कोई शिक्षक गैर जनपद से स्थानांतरित होकर आता है तो तबादला आदेश सहित उसके सभी शैक्षक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाना जरूरी है। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद भी अध्यापक को वेतन दिया जाता है। महराजगंज जिले में नियुक्ति 1995 में दर्शाकर 14 अगस्त 2000 को स्थानांतरण और चार सितंबर 2000 को कार्यमुक्ति आदेश लेकर कथित शिक्षिका ममता राय मऊ आई। 6 नवंबर 2000 को उसका पदस्थापन रतनपुरा ब्लाक के बिलौंझा प्राथमिक विद्यालय 1 पर किया गया। तब से लेकर 25 सालों तक ममता या रंभा विभाग से पदोन्नति से लेकर वेतन सहित सभी आर्थिक लाभ लेती रही।
जानकारों का कहना है कि यदि उस समय कथित ममता राय के स्थानांतरण आदेश और उसके शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया होता तो यह फर्जी वाड़ा उसी समय पकड़ में आ गया होता। लेकिन तत्कालीन बीएसए बच्चूलाल राही ने इस शिक्षिका के स्थानांतरण आदेश और शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं कराया। इतना ही नहीं बाद के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी इस शिक्षिका के आधार और अन्य संबंधित प्रमाण पत्रों की जांच कराने की जहमत नहीं उठाई।
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भरोसमंद सूत्रों कहना है कि विभाग में विशिष्ट बीटीसी योग्यता वाले काफी अध्यापक ऐसे हैं जिनकी डिग्रियां फर्जी हैं लेकिन इनके सत्यापन में लोच है। इसकी सत्यापन रिपोर्ट भी फर्जी है। लेकिन तत्कालीन जिम्मेदार अफसरों ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया जिसका परिणाम है कि ये आज भी अपने पदों पर बने हुए हुए हैं।
बीएसए ओूपी त्रिपाठी ने कहा कि जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात अध्यापकों के सभी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए समिति का गठन किया गया है। जिले में एक भी फर्जी शिक्षक नहीं बच पाएगा। अब तक 40 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है।
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