सर्द मौसम ने घने कोहरे की चादर ओढ़ ली। रविवार की सुबह कोहरे की बीच हुई। जैसे-जैसे शाम फिर रात गहराती गई, वैसे-वैस कोहरे की चादर मोटी होती गई। सुबह तो हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।
सड़कों पर वाहन रफ्तार ही नहीं पकड़ सके। 11 बजे के बाद ही कुछ देर के लिए धूप निकली। दोपहर बाद फिर कोहरा छा गया। रेलवे का परिचालन प्रभावित रहा।
कोहरे से सड़कों पर सुबह वाहन काफी कम संख्या में दिखे। लखनऊ कानपुर मथरा दिल्ली इलाहाबाद जैसे महानगरों को चलने वाली रात्रिकालीन बस सेवाएं प्रभावित हुईं।
जरूरी कामों के लिए शहरों बाजारों में जाने के लिए वाहन पाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। ठंड और कोहरा बढ़ने से किसानों में भी रबी फसल के लिए अच्छे संकेत मानकर कुछ उम्मीद बढ़ी है। जानकारों का मानना है कि कोहरे के साथ यदि हवाएं चलंगे तो ठंड में काफी इजाफा हो जाएगा।
जिले में भीषण सूखे के बाद ठंड आने में हो रही देरी से किसानों में रबी की मुख्य फसल गेहूं के भविष्य को लेकर चिंता थी। पूरा नवंबर माह बीत गया और ठंड काफी कम रही।
दिसंबर महीने का भी एक सप्ताह बीत जाने के बाद ठंड कुछ खास नहीं रही। लेकिन अचानक कोहरे के आने से किसानों में इस बावत की आशंका बढ़ गई है कि काफी जतन के बाद रबी फसल की बोआई के लिए खेतों में पानी भरा गया है , उनके जुताई योग्य होने में अब काफी वक्त लग सकता है।
इसके चलते गेहूं की बोआई लेट होने का खतरा बढ़ सकता है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह पटेल का कहना है कि कोहरे और ठंड से अभी रबी फसलों के लिए कोई नुकसान नहीं हैं अपितु गेहूं की फसल के लिए ठंड लाभदायक है। नवंबर महीने के अंत तक ठंड काफी कम पड़ रही थी जो गेहूं की फसल की वृद्घि के लिए अनुकूल नहीं था।