दोहरीघाट के तटवर्ती इलाके नवली-चिउडीडाड़ में घाघरा के पानी में डूबी धान की फसल।
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दोहरीघाट। नेपाल से पानी छोड़े जाने के चलते घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर बह रही है। बृहस्पतिवार को जलस्तर में 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। बंधों पर पानी का दबाव बढ़ गया है। नदी में बैकरोलिंग होने से तटवर्ती इलाकों की जलमग्न हजारों एकड़ फसल के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। जबकि तटवर्ती इलाके के लोग दशहत में हैं। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो बृहस्पतिवार को गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर 70.10 मीटर रहा।जबकि बुधवार को 69.95 मीटर रहा। खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। इस प्रकार नदी के जलस्तर में 24 घंटे में 15 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी अब खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 20 सेमी ऊपर बह रही है। बंधों पर नदी का दबाव बढ़ने लगा है। नदी में बैकरोलिंग होने से कस्बे के मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, रामजानकी मंदिर, दुर्गा मंदिर, डीह बाबा का मंदिर, लोकनिर्माण का डाक बंगला, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी का जलस्तर खतरा बिंदु के पार करने से नवली, लामी, नई बाजार, रामपुर धनौली, कोरौली, बेलौली, जमीरा चौराडीह, पाऊस, बहादुरपुर, रसूलपुर, सूरजपुर सहित विभिन्न तटवर्ती गांवों में हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। गांवों में बाढ़ का पानी घुसने की आशंका से लोग दहशत में जी रहे हैं।