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Mau News: पांच रेलवे ओवरब्रिज बने, विद्यालयों और मेडिकल कॉलेज ने विकास को दी बूस्टर डोज

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अब:नगर के गायघाट पर बना मऊ महादेव मंदिर, घाट साफ हुई नदी।संवाद - फोटो : भाजपा कार्यालय में आयोजित प्र​शिक्षण कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ता।
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पच्चीस वर्ष पहले मऊ की पहचान सिर्फ साड़ी और शांत गलियों तक सीमित थी। आज वही मऊ पूर्वांचल के नक्शे पर एक नए विकास मॉडल के रूप में उभर रहा है। जनसंख्या बढ़ी है, घरों की संरचना बदली है और सबसे बड़ा बदलाव सोच व सुविधाओं में देखने को मिला है।
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पूर्वांचल में वाराणसी के बाद मऊ ऐसा शहर है, जहां पांच रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या में काफी कमी आई है। जनपद के कसारा में मेडिकल कॉलेज, 100 बेड के टड़ियांव सीएचसी, क्रिटिकल केयर यूनिट और कैंसर उपचार की सुविधाएं विकसित की गई हैं।
वर्ष 2000 के आसपास मऊ जनपद की आबादी लगभग 16 लाख थी, जो अब बढ़कर 26 लाख के करीब हो गई है। पहले घर अधिकतर कच्चे या छोटे पक्के होते थे। केंद्र सरकार की आवास योजनाओं के तहत अब कच्चे मकान काफी हद तक समाप्त हो गए हैं।
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शहर का दायरा बढ़ा है और नई कॉलोनियां, बहुमंजिला इमारतें व पक्के घर तेजी से बढ़े हैं। गांवों से लोग शिक्षा और रोजगार के लिए मऊ में बस रहे हैं, जिससे आबादी में निरंतर वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय, राजकीय डिग्री कॉलेज खुलने से विद्यार्थियों को सहूलियत हुई है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में विस्तार
पहले मऊ में कॉलेज गिने-चुने थे, लेकिन अब हर क्षेत्र में स्कूल और महाविद्यालय खुल चुके हैं। जनपद के कसारा में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से स्वास्थ्य सुविधाओं को नया आयाम मिला है। अब गंभीर मरीजों को वाराणसी या गोरखपुर जाने की आवश्यकता कम हुई है। इसके अलावा जिले में 100 बेड का अस्पताल और महिला अस्पताल भी संचालित हैं। जिले में 100 बेड के टड़ियांव सीएचसी, क्रिटिकल केयर यूनिट और कैंसर उपचार की सुविधाएं विकसित की गई हैं। साथ ही 50 से अधिक निजी अस्पतालों के संचालन से अन्य जनपदों से भी मरीज इलाज के लिए यहां आ रहे हैं।

तमसा नदी के किनारे बना महादेव मंदिर आस्था का केंद्र बना
तमसा नदी के किनारे बना नव-निर्मित महादेव मंदिर अब पूर्वांचल में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इसके साथ ही देवलास, खुरहट, दोहरीघाट और घोसी के प्राचीन मंदिरों का भी जीर्णोद्धार हुआ है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है। साड़ी उद्योग के साथ-साथ छोटे और मध्यम व्यवसायों का विस्तार हुआ है। हालांकि बढ़ती आबादी और वाहनों के कारण ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कमी और प्रदूषण जैसी समस्याएं भी उभरकर सामने आई हैं। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मऊ से देश के कई प्रमुख महानगरों-मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत, जयपुर और जोधपुर—के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। इससे साड़ी उद्योग को भी नई गति मिली है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और फोरलेन से विकास को गति
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान की है, जिससे औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। मऊ-गोरखपुर फोरलेन मार्ग बनने से वाराणसी और गोरखपुर की यात्रा सुगम हुई है। दो ओवरब्रिज का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसके पूर्ण होने पर जाम की समस्या में और राहत मिलेगी। मधुबन तहसील क्षेत्र में राजकीय डिग्री कॉलेज खुलने से देवारा क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ रहा है। जिले में तीन राजकीय, चार सहायता प्राप्त और 150 से अधिक निजी महाविद्यालय संचालित हैं। फतहपुर मंडाव क्षेत्र के कमलसागर में मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यहां प्री-प्राइमरी से 12वीं तक की शिक्षा की व्यवस्था होगी और लगभग 1500 छात्र-छात्राएं आधुनिक सुविधाओं के साथ अध्ययन कर सकेंगे।

अब:नगर के गायघाट पर बना मऊ महादेव मंदिर, घाट साफ हुई नदी।संवाद- फोटो : भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ता।

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