आठ लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे बढ़ रही जांच, नामों में हो सकता है इजाफा
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। जनपद में धर्मांतरण का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जहां यह मामले जिले के सुदूर क्षेत्रों से आते थे अब शहर के प्रतिष्ठित अस्पताल से जुड़े लोगों पर भी भी चंगाई सभा और उपचार के नाम पर धर्मांतरण का आरोप लगा है।
आमतौर पर धारणा थी कि शिक्षा के अभाव में लोग ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंस रहे हैं। चंगाई सभा के नाम पर आयोजित होने वाली बैठकों में साक्षर लोगों की भी मौजूदगी होने लगी। अब ताजा मामला प्रबुद्ध वर्ग का भी सामने आया है।
शहर के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल के व्यवस्थापक का नाम धर्मांतरण से जुड़ गया है। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बीते दिनों आयोजित होने वाले चंगाई सभा स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज निकालकर जांच कर रही है।
धर्मांतरण के सैनिक मामले हैं जिसमें स्थानीय लोगों की सहभागिता से लालच देकर लोगों का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश की गई है। मधुबन तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत सहित मझवारा, घोसी, बरलाई हर जगह पर ऐसे मामले सामने आए हैं।
धर्मांतरण के मामलों में पुलिस की कार्रवाई भी बेहद ढुलमुल रहता है। बीते 18 जनवरी को शहर कोतवाली क्षेत्र के निजामुद्दीनपुरा मुहल्ले में धर्म परिवर्तन के आरोप में बड़े नाम आने के बाद पुलिस इस मामले में धर्म परिवर्तन के दूसरों मामलों को जोड़कर भी जांच में जुटी है।
दरअसल इस मामले में नगर के बड़े मिशनरी अस्पताल के व्यवस्थापक के नाम आने से यह मामला हाई प्रोफाइल होने से पुलिस अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं। उधर, शहर कोतवाली पुलिस के इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर शुक्रवार से यह विषय चर्चा का विषय बना रहा।
सीओ सिटी कृष राजपूत ने बताया कि मामले में आठ नामजद आरोपियों से पूछताछ पर कई इनपुट मिले है। इन इनपुट के आधार पर कई एंगल से जांच हो रही है। सीओ सिटी ने बताया कि निजामुद्दीनपुरा मुहल्ले में लगे कई घरों के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और आरोपियों से मिले इनपूट से इस प्रकरण की जांच हो रही है। इस मामले में दो टीमें जांच में जुटी है।
भोले-भाले लोगों को बरगला रहे : सुजीत सिंह
हिंदू जागरण समिति के जिलाध्यक्ष सुजीत सिंह ने आरोप लगाया कि जिले में प्रार्थना सभा की आड़ में भोले-भाले ग्रामीणों को बरगलाकर धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसमें खासतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता है कि जो काफी समय से अपने घर के किसी सदस्य के बीमारी से परेशान हो। साथ ही कम शिक्षा भी धर्म परिवर्तन कराने वाले लोगों का दूसरा मुख्य हथियार है। ऐसे लोग ऐसे ही पीड़ित लोगों के बीच से किसी को अपना साथी चुनकर उनके मदद से प्रार्थना सभा कराते है। जिसमें बीमारी, पागलपन, भूत-प्रेत दूर करने और समस्याओं के समाधान का झांसा दिया जाता है।