मऊ। सावन के पहले सोमवार को नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में श्रद्धालु घरों पर ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।साथ ही विधि विधान से पूजन अर्चन करेंगे। कोरोना संक्रमण के चलते शिव मंदिरों में होने वाले जलाभिषेक पर रोक रहेगी। सावन माह सोमवार से शुरू हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के पहले सोमवार का खास महत्व होता है।सावन के पहले सोमवार की चल रही तैयारी रविवार को पूरी हो गई। भक्तों की तरफ से नगर स्थित पक्का पोखरा शिवमंदिर, शीतलामाता धाम, गाजीपुर तिराहा स्थित शिव मंदिर, कतुआपुरा शिवाला, मठियाटोला शिवमंदिर, हनुमानघाट, भीटी स्थित शिवमंदिर, पावरहाउस कालोनी स्थित शिवमंदिर, बालनिकेतन मोड़ स्थित शिवमंदिर और कैलाशपुरी सहि विभिन्न मंदिरों को सजाने संवारने की तैयारी चलती रही। मान्यताओं के अनुसार देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग कर दिया था। अपने शरीर का त्याग करने से पूर्व देवी ने महादेव को हर जन्म में पति के रुप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमालय और रानी मैना के घर में जन्म लिया। इस जन्म में देवी पार्वती ने युवावस्था में सावन के माह में निराहार रहकर कठोर व्रत किया। यह व्रत उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किए। भगवान शिव पार्वती से प्रसन्न हुए और बाद में यह व्रत सावन के माह में विशेष रुप से रखे जाने लगे। इसी मान्यता के तहत नगर के सहादतपुरा, ब्रह्मस्थान, इमिलिया, मुंशीपुरा, चौक, मिर्जाहादीपुरा सहित घोसी, मुहम्मदाबादगोहना, मधुबन, दोहरीघाट सहित विभिन्न इलाकों में सावन माह के पहले सोमवार को शिवभक्त घरों पर ही विधि विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ ही पूजन अर्चन करेंगे। मंदिरों पर पुजारी ही पूजन अर्चन करेंगे।