बजट न भवन जुगाड़ से चलाते फायर स्टेशन
भीषण गर्मी और पछुवा हवाओं के बीच छोटी सी भी चिंगारी लोगों का आशियाना एवं किसानों की फसल को बर्बाद कर दे रही है। आग से बचाव के लिए जिले में कहने को तो अग्निशमन विभाग है लेकिन यह खुद व्यवस्था से जूझ रहा है। आलम यह है कि अग्निशमन विभाग जैसे-तैसे जुगाड़ की गाड़ी से चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय पर भी फायर स्टेशन नहीं है। ग्रामीण अंचलों में तो महज एक-एक बोलेरो कैंपर की व्यवस्था की गई।
जिले में अग्निशमन विभाग शहर कोतवाली के सामने पुलिस के कालोनी में चलता है। विभाग के पास जिला मुख्यालय और तहसील क्षेत्रों में कोई फायर स्टेशन नहीं है। जिला मुख्यालय पर फायर स्टेशन के नाम पर अब तक न तो कोई बजट आया और न ही इसके लिए चिह्नित भू ही विवादों से निकल पाई। फायर स्टेशन के लिए सरायलखंसी थाने के बगल में भूमि ली गई है लेकिन यह विवाद के चलते कोर्ट में है।
मधुबन और मुहम्मदाबादगोहना में फायर स्टेशन के लिए भूमि तो मिल गई है लेकिन बजट अब तक नहीं मिला है। घोसी में फायर स्टेशन के लिए भूमि की व्यवस्था की जा रही है। विभाग का कहना है कि तहसील मुख्यालयों में घोसी, मधुबन में एक-एक बोलेरो कैंपर के साथ 6-6 फायरकर्मी दिए गए हैं। मुहम्मदाबाद में इसकी व्यवस्था की जा रही है। जिले में तीन फायर टैंकर हैं जो जिला मुख्यालय पर किसी भी परिस्थिति से सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
यहां तीन बोलेरो कैंपर,जीप आैर हाईप्रेशर मशीन है, जरूरत पड़ने पर तहसील मुख्यालयों पर भेजे जाते हैं।