यूपी बोर्ड हाईस्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा में अगर नकल गिरोह की सक्रियता मिलती है, तो बोर्ड की तरफ से नकल निवारण अधिनियम की जगह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही एक करोड़ का जुर्माना और संपत्तियों को जब्त भी किया जा सकता है।
यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा 18 फरवरी से शुरू हो रही है, लेकिन तैयारी अंतिम दौर में चल रही है। परीक्षा को नकलविहीन संपन्न कराने के लिए जिले में 127 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें हाईस्कूल के 37431 और इंटरमीडिएट के 38977 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे।
शासन ने जिला विद्यालय निरीक्षक की शक्तियों में भी बढ़ोतरी की है। अब डीआईओएस को परीक्षा केंद्रों की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई और केंद्र व्यवस्थापकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के व्यापक अधिकार दिए गए हैं।
यदि किसी परीक्षा केंद्र पर सामूहिक नकल या बाहरी हस्तक्षेप की शिकायत मिलती है तो तत्काल प्रभाव से केंद्र को निरस्त करने की संस्तुति भी की जा सकेगी। निर्देशों के अनुसार यदि जांच में यह सामने आता है कि नकल के पीछे किसी गिरोह की भूमिका है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कठोर धाराओं में मुकदमा कायम किया जाएगा।
गंभीर मामलों में एनएसए लगाने की भी तैयारी रहेगी, ताकि भविष्य में ऐसे तत्वों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि बोर्ड परीक्षा को हर हाल नकलविहीन संपन्न कराया जाएगा। परीक्षा अवधि में कानून-व्यवस्था, गोपनीयता और पारदर्शिता को इस बार काफी सख्ती बरती जाएगी। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का प्रावधान भी बोर्ड ने किया है।