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छठ वेदियां तैयार, जमकर खरीदारी

Fri, 04 Nov 2016 11:33 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
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छठ वेदियां तैयार, जमकर खरीदारी
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सूर्योपासना का पर्व शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। व्रती महिलाओं ने शाम को लौकी की सब्जी और चने की दाल के साथ ही अरवा चावल के भात से व्रत की शुरुआत की। शनिवार को खरना की रस्म होगी। महिलाओं ने पर्व के मद्देनजर जमकर खरीदारी भी की।सूर्य पूजा की परंपरा बहुत ही पुरानी है। सूर्य पूजा का विशिष्ट दिवस सूर्य षष्ठी है, जिसे डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। छठ पर्व पर बड़े ही धूमधाम से अस्ताचलगामी सूर्य की आराधना होती है।
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कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उदीयमान भगवान दिनकर को अर्ध्य देकर उनसे मन्नत मांगी जाती है। महिलाएं अपने पुत्र और सुख समृद्धि की कामना करती हैं। लेकिन जिनकी कोख सूनी है, वह महिलाएं भी सूर्य को नमन करेंगी। कहते हैं कि इसी दिन वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था। साथ ही इसी दिन ऋषि विश्वामित्र के मुख से गायत्री मंत्र उद्भव हुआ था। तभी से ही छठ पूजा की परंपरा शुरू हुई। इसी मान्यता के तहत व्रती महिलाओं ने शाम को लौकी की सब्जी और चने की दाल के साथ ही अरवा चावल के भात से व्रत की शुरुआत की।

छह नवंबर को विधि विधान से महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। साथ ही सात नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। शुक्रवार को दिन भर लोगों को पवित्र पोखरों, नदी तट आदि स्थानों पर लोगों को वेदी बनाते देखा गया। उधर महिलाएं बाजारों में सूप, डलिया, पूजा सामग्री और फलों आदि की खरीदारी कीं। यही वजह था कि बाजारों में पूरे दिन गहमागहमी का आलम रहा।
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मझवारा संवाददाता के अनुसार छठ महापर्व की तैयारी तेज हो गई हैं।

इस बार यह पर्व चार नवंबर से शुरू होकर सात नवंबर को सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन होगा। मझवारा क्षेत्र के ज्योतिषाचार्य भगवान पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को पूूर्वाह्न  5.38 बजे से पंचमी शुरू हो जाएगी, जो शनिवार की सुबह 6.55 तक  रहेगी। व्रत का प्रतिहार षष्ठी व स्कंद षष्ठी व्रत छह नवंबर यानी रविवार को होगा। इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर रात भर प्रतीक्षा कर सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। बताया कि रविवार को दिन में सूर्य षष्ठी का व्रत होने से सूर्योपासना श्रेष्ठ फलदायक है। क्योंकि चंद्रमा सूर्य के केंद्र में स्थित होने से आनंद नामक शुभ राजयोग बन रहा है। इसलिए यह पर्व स्वास्थ्य और संतान के लिए शुभ है।


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