मऊ। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुरेश कुमार गुप्ता ने नाबालिग को बहला फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में नामजद दो आरोपियों में पुत्र को 10 वर्ष का कारावास की सजा के साथ ही 28 हजार रुपये जुर्माना लगाया। वही पिता को बहला-फुसलाकर भगाने में सहयोग करने तथा पाक्सो एक्ट में पांच वर्ष का सश्रम कारावास की सजा के साथ ही 13 हजार रुपये जुर्माना लगाया । मामला हलधरपुर थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार वादिनी मुकदमा की 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को नवलपुर रतोही गांव निवासी रवि राजभर अपने पिता टुनटुन राजभर के सहयोग से 29 मई 2014 की रात में विवाह करने का झांसा देकर बहला फुसलाकर कर भगा ले गया। आरोप है कि इस दौरान आरोपी रवि पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना आरोपपत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव और प्रवीण कुमार मिश्र ने कुल 6 गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से राजेंद्र चौहान को पेशकर तर्क दिया गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद आरोपी रवि को नाबालिग को बहला फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म करने का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा के साथ ही बीस हजार रुपये अर्थदंड, शादी के आशय से भगाने के मामले में 5 वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड और नाबालिग को भगाने के मामले में तीन वर्ष की सजा के साथ ही तीन अर्थदंड निर्धारित किया । अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं टुनटुन राजभर को नाबालिग को शादी के आशय से भगाने मे दोषी पाते हुए क्रमश: पांच व तीन वर्ष की सजा के साथ ही कुल आठ हजार रुपये अर्थदंड तथा पाक्सो एक्ट मे पांच वर्ष की सजा के साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर 5 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।