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पिता और बेटी के संबंध का नहीं हो सकता दुनिया में कोई भी मोल

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स्नह्वद्यद्य ङ्कद्बद्ग2 इब्राहिमाबाद सिपाह में श्री वैष्णों सेवा यात्रा समिती के तत्वावधान मे? - फोटो : MAU
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मऊ। श्री वैष्णो सेवा यात्रा समिति की तरफ से घोसी ब्लाक क्षेत्र के इब्राहिमाबाद सिपाह में चल रही श्री राम कथा के विश्राम दिन प्रयागराज से पधारीं कथा वाचिका मानस मंदाकिनी रागिनी सरस्वती ने राम विवाह के बाद मां सीता विदाई का भाव पूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि सीता की विदाई के समय राजा जनक जैसे ज्ञानी भी अपने धैर्य पर संयम नहीं रख सके थे। पिता और बेटी के संबंध का दुनिया में कोई भी मोल नहीं हो सकता । बेटी का जीवन मेहंदी की तरह है जो पीसकर भी रंग लाती है। बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं है। इसलिए मनुष्य को अपनी सोच में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है राजा जनक अपनी पुत्री जानकी के नाम से पहचाने जाते थे। उनके पुत्र लक्ष्मीनिधि के कारण नहीं उसी तरह हिमाचल का नाम भी माता पार्वती के कारण है । केवट जैसा राम का कोई भक्त नहीं राम वनवास का विस्तार से वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि कई कारण ही राम का नाम तो है यदि कई जैसी नारी नहीं होती तो राम का यह भी इतना बड़ा नहीं होता। उन्होंने राम केवट प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि राम केवट से मिले जो अनुरागी भक्त हैं जिसके जीवन में पाखंड नहीं अभी तो निर्मलता है। केवट राम के परम प्रिय भक्त हैं। जिनमें से राम को नाव मांगनी पड़ी। जगत रामजी से मांगता है परंतु जगतपति राम केवट से नाव मांगने आते हैं केवट जैसा कोई और भक्त नहीं हुआ जो राम जी को डांटता है और राम जी खड़े होकर मुस्कुराते हैं अत: भगवान को केवट अनुराग से पाया जा सकता है इंसान वही अपनी गलती में करे सुधा। उन्होंने कहा कि इंसान वही अच्छा है जो अपनी गलती में सुधार कर लें तथा सबसे प्रेम पूर्ण व्यवहार करें। वाणी से ही दोष पैदा होता है और वाणी से ही प्रेम भी मिलता है। इसीलिए अच्छा व्यवहार एवं विचार मनुष्य को एक नई पहचान दे सकता है।
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