मौसम का मिजाज बार बार बदलने से किसान से लेकर आम नागरिक बच्चे बूढ़े सभी परेशान हैं। सरसो, टमाटर ,अरहर सहित कई दलहनी फसलों और आम के बौरों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
बुधवार को दिन में कई बार बूंदाबांदी भी हुई। दलहनी और तिलहनी फसलों पर मौसम की मार का खतरा मंडराता देख किसान सहमे हैं। बुधवार की सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। कभी कभी बादल छंट जाते तो धूप निकल आती लेकिन सूर्य की आंख मिचौली का खेल पूरे दिन भर जारी रहा। तापमान में उतार चढ़ाव देख देख गया। बुधवार को कभी 15 तो कभी 26 सेंटीग्रेट तक तापमान देखा गया। दिन में दोपहर में अंधड़ भरी तेज हवाएं भी चलीं उसके बाद मौसम में ठंड बढ़ गई। सरसों, मसूर, मटर, आलू की साठ फीसदी फसल पक कर तैयार होने की करीब है। बारिश इन फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है। जिस पर किसान बारिश न होने की प्रार्थना करने लगे हैं।
पहले ही किसानों की सरसो की फसल लाही के प्रकोप से पहले ही बरबाद हो चुकी है। किसानों का मानना है कि अगर बारिश होती है तो नुकसान होना तय है। किसान रामप्रवेश , हरेंद्र सिंह, राकेश मिश्रा, बृजेश सिंह ,अशोक यादव, राम नगीना यादव, अवधेश गुप्ता, सुरेश गुप्ता ने कहा कि दलहनी और तिलहनी फसलों के साथ आलू, सब्जी सहित अगेती बोई गई गेहूं की फसलों को भारी नुकसान होगा।
पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. संजय सिंह ने बताया फरवरी माह की बारिश वैसे भी फसलों के लिए लाभाकारी नहीं मानी जाती है। मौसम खराब होने से सरसो, चना और अरहर की फसल में कीटो का प्रकोप बढ़ जाएगा। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों पर कीटनाशक दवा का प्रयोग करने से नुकसान से बच सकते हैं । फरवरी में बारिश होगी तो फसलों में क्षति तय है।