रानीपुर। सरकार की तरफ से ब्लाक क्षेत्र के प्रत्येक गांवों में अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाए जाने का फरमान विभागीय उदासीनता से बेअसर साबित हो रहा है। अब तक 87 गांवों के सापेक्ष मात्र दो गांवों मेें ही पशु आश्रय स्थल का निर्माण किया जा सका है। हालत यह है कि छुट्टा पशु जहां किसानों की मेहनत कमाई की धान सहित अन्य फसलों को तहस नहस कर दे रहे हैं।
किसानों को रात के समय अपने जान को जोखिम में डालकर खेत की रखवाली करनी पड़ रही है। परेशान किसानों ने कई बार प्रदर्शन भी किया। इसके बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इस समय धान की फसल में रेड़ा आने को है। छुट्टा पशु किसानों की फसल को चट कर दे रहे हैं। छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय स्थल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों, सचिवों तथा खंड विकास अधिकारी की है। लेकिन सभी कार्य कागज पर चल रहा है। क्षेत्र के भुसुवा, खुरहट, बड़ागांव, पलिगढ़, तेंदुली, पड़री, दशबारी, सरसेना, सिरसा, पलिया में पशुओं का शाम से ही कब्जा रहता है। सड़क दुर्घटना का ग्राफ बढ़ गया है। अब तक एक 18 वाहन चालक छुट्टा पशुओं के हमले से घायल हो चुके हैं। बीते माह ब्लाक के भुसुवा, पलिया, रानीपुर, गोकुलपुरा के ग्रामीणों ने छुट्टा पशुओं की समस्या से परेशान होकर खुरहट रानीपुर मार्ग पर भुसुवा गाव के समीप सिक्स लेन अंडरपास पुल के घंटो मार्ग जाम कर दिया था। अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इस संबंध में क्षेत्र के श्रीकांत यादव, रविंद्र नाथ सिंह, महेंद्र मौर्य, जर्नादन प्रसाद का कहना है कि छुट्टा पशुओं की जिस हिसाब से संख्या बढ़ रही है। फसल बचना मुश्किल ही लग रहा है। शिकायत के बाद भी अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। समस्या का समाधान अविलंब नहीं किया गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे।