मऊ। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एल सी वर्मा ने किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि मादा कीट पत्तियों पर समूह में अंडे देती है जिससे सूंड़ियां निकल कर हानि पहुंचाती हैं। सूंड़ी हल्के पीले रंग की तथा नारंगी पीले सिर वाली होती है। मादा कीट के पंख पीले तथा दोनों पंखों के मध्य काला धब्बा होता है। इसके उदर के अंतिम सिरे पर पीले भूरे रंग के बालों का गुच्छा होता है। इस कीट की सूंड़ियां तने के निचले भाग में वेधकर प्रवेश कर जाती हैं तथा अंदर से खोखला कर देती हैं जिसके कारण तना सूख जाता है और खींचने पर आसानी से बाहर आ जाता है। आक्रमण के फलस्वरूप फसल की वानस्पतिक अवस्था में मृत गोभ (डेड हर्ट) बनता है तथा बालियां निकलने के समय आक्रमण होने पर दाने रहित सफेद बालियां निकलती हैं। तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई देने पर थायाक्लोप्रिड 21.7% एससी कि 500 मिलीलीटर मात्रा 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर या डेल्टामेथ्रिन 11प्रतिशत ईसी 150एमएल 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर या ट्राईजोफास 40 प्रतिशत ईसी 1250 मिली प्रति हेक्टेयर या फलूबेंदयामाइट 39.35 प्रतिशत ईसी 50एमएल 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर या फिप्रोनिल 80 प्रतिशत डब्लूसी 50 से 62.5 ग्राम 375 से 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर या कार्बोसल्फान 25 ईसी एक लीटर प्रति हेक्टेयर या इथोफेनाप्रावस 10 प्रतिशत ईसी एक लीटर प्रति हेक्टेयर या कयूनालफास 25 प्रतिशत ईसी दो लीटर प्रति हेक्टेयर या क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 50% एसपी एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या वाईफेध्रिन 10 प्रतिशत ईसी 500एमएल प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।