किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की 114 वीं जयंती शुक्रवार को दोहरीघाट स्थित चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल हेड पर मनाई गई। लोकदल के प्रदेश महासचिव के नेतृत्व में नेताओं ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।
पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद लोक दल महासचिव देवप्रकाश राय ने कहा कि वर्ष 1959 में नागपुर के कांग्रेस महाधिवेशन में कहा था कि देश में रूस की तरह फार्मिंग खेती के पं. नेहरू के प्रस्ताव का विरोध किया था। चौधरी साहब के विरोध के चलते ही भारत के किसान बच गए।
कहा कि उत्तर प्रदेश से जमींदारी उन्मूलन, चकबंदी व्यवस्था को लागू करना, पटवारियों का एकाधिकार समाप्त करना, गृहमंत्री के रूप में आईएएस परीक्षा हिंदी में कराने, पिछड़ों के अधिकार के लिए मंडल कमीशन का गठन चौधरी साहब की ऐतिहासिक फैसले हैं। ग्रामीण विकास बैंक और ग्राम्य विकास मंत्रालय की स्थापना उनकी ही देन है। कहा कि चौधरी साहब ने आजीवन किसानों के हित के लिए संघर्ष किया। वे एक कुशल प्रशासक और ईमानदार व्यक्तित्व के स्वामी रहे।
उन्होंने कभी भी भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया और भ्रष्टाचारियों के विरुद्घ कठोर कार्रवाई की वकालत की। जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने दोहरीघाट पंप कैनाल को समय से चलाने और जिले में धान की खरीददारी तेज करने की मांग किया। उधर कृषि भवन में कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। चौधरी साहब के चित्र पर माल्यार्पण करके सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी ने चौधरी साबह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
उप कृषि निदेशक आशुतोष मिश्र ने प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के संचालित योजनाओं के बारे में बताया। इस अवसर पर किसानों को सम्मानित किया गया।
उधर सपा कार्यालय पर चौधरी चरण सिंह की जयंती मनाई गई।
सपा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र यादव ने चौधरी चरण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके जीवन पर प्रकाश डाला। बताया कि किसान परिवार में जन्मे चौधरी चरण सिंह ने अपने जीवनकाल में राजनैतिक कठिनाईयों का सामना करते हुए अपनी पहचान बनाई।
वर्ष 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के बाद उन्होंने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया। वर्ष 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में चौधरी चरण सिंह को छह माह की जेल हुई। 1937 में 34 वर्ष की उम्र में वह पहली बार बागपत जिले के छपरौल विधानसभा से विधायक चुने गए।
आजादी के बाद उन्होंने विधानसभा व राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया। पंडित गोविंद वल्लभ भाई पटेल की सरकार में वह पार्लियामेंट सेक्रेटरी चुने गए। वर्ष 1967 में कांग्रेस छोड़कर उन्होने भारतीय क्रांति दल के नाम से नई पार्टी बनाई। राम मनोहर लोहिया और राज नारायण के सहयोग से 1967 से 70 तक वह मुख्यमंत्री रहे।
1975 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चौधरी चरण सिंह समेत देश के बड़े नेताओं को जेल भेजा। इस मौके पर कुद्दूस अंसारी, रामधनी चौहान, सदानंद यादव, अशोक यादव, संजय चौधरी, धीरज राजभर, बन्ने खां, विनोद तिवारी आदि रहे।
घोसी संवाददाता के अनुसार जद यू की ओर से चौधरी चरण सिंह की 114वीं जयंती पुरानी चीनी मिल के प्रांगण में मनाई गयी।इस अवसर पर युवा प्रदेश उपाध्यक्ष बद्री तिवारी, जिलाध्यक्ष चन्द्रबली चौहान,राजेश राय, हरिश्चंद्र,ज्ञान चंद्र,सत्यदेव चौधरी, मुसाफ़िर यादव आदि उपस्थित रहे।