नगर क्षेत्र से सटे इंदरपुर भलया गांव में खेत में मड़ाई के बाद रखा भूसा।
पछुवां हवाएं और तल्ख धूप के बीच अन्नदाता युद्ध स्तर गेहूं की कटाई और मड़ाई में जुटे हुए हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद तो वह खुद के बीमार होने की भी चिंता नहीं कर रहे हैं। दिन में कटाई और मड़ाई का कार्य तो कर ही रहे हैं
देर रात को भी अनाज और भूसे को जल्द से जल्द घर में सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में हैं।
जिले में वर्ष 2015-16 में लगभग 90 हजार हेक्टेयर के क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई हुई ।
बीच में एक बार मौसम खराब होने से हालांकि किसानों का मामूली नुकसान हुआ। बावजूद इसके गेहूं की फसल देखकर किसान खुश नजर आ रहे हैं। पिछली बार खड़ी फसल कटने से पहले से ओलावृष्टि ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया था। अधिकांश गेहूं की फसल खेत में ही सड़ गई थी।
इस वर्ष भी किसानों को यही भय सता रहा। मौसम विभाग द्वारा 14 अप्रैल के बाद मौसम खराब होने की चेतावनी के बाद किसानों के फिर से होश उड़ने लगे। वह ट्रैक्टर आदि से गेहूं की यथाशीघ्र कटाई और मड़ाई कर अनाज और भूसा अपने घर में रखने के लिए युद्ध स्तर पर लग गए हैं। मौसम के भय की वजह से पूरे जिले में 60 प्रतिशत से अधिक गेहूं की फसल की कटाई और मड़ाई हो चुकी है।