मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को तीन माह में विभाग में मिलाने का आश्वासन दिया है।
परिषदीय स्कूूलों में शिक्षकों की मौजूदगी, बच्चों की संख्या और उनकी उपस्थिति जांचने के साथ ही एमडीएम योजना के संचालन पर मुख्यालय से ही नजर रखी जा सकेगी। यह संभव होगा मोबाइल एप्लीकेशन से। जिसका कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शुक्रवार को सिनर्जी टेलिमैट्रिक्स प्राक्टर लि. ने प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इसको शिक्षा दूत मऊ की संज्ञा दी। डीएम ने बताया कि बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने एवं शिक्षकों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए इससे मानीटरिंग की जा सकेगी।
कहा, बच्चों की वास्तविक उपस्थिति , कक्षा में बच्चों का आनलाइन फोटो तथा स्कूल की गूगल लोकेशन और अध्यापकों की उपस्थिति, शिक्षा दूत मोबाल अप्लीकेशन तथा निरीक्षण मोबाइल अप्लीकेशन से संभव होगा। शिक्षकों को अवकाश लेने की प्रक्रिया भी इससे ही अपनानी होगी।
कहा कि आधुनिक कंट्रोल रूम की स्थापना से बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर उसके अनुरूप कार्ययोजना बनाने में मदद मिलेगी। इस कंपनी के सहयोग से जनपद के सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में यह योजना लागू की जाएगी।
इससे बच्चों एवं शिक्षकों की उपस्थिति रिकार्ड की जाएगी। जिलाधिकारी ने मातहतों को निर्देश दिया कि इस कार्ययोजना को तुरंत लागू करके जिला मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम बनाया जाए। इससे बच्चों की उपस्थिति एवं अध्यापकों की उपस्थिति तथा एमडीएम की सही स्थिति की जानकारी मिलती रहेगी। इससे शिक्षा में सुधार आएगा।