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हर दिन रेलवे को नौ लाख रुपये की लग रही है चपत

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मऊ। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद 23 दिन बीतने के बाद रेलवे को लगातार घाटा का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे को प्रतिदिन केवल 30 से 40 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। जबकि लॉकडाउन से पहले रेलवे को प्रतिदिन दस लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। बीते तीन माह में अकेले एमएसटी न बनने से ही रेलवे को 12 लाख रुपये का नुकसान हुुआ है।
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एक जून से देश में 100 जोड़ी ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। मऊ जंक्शन से तीन ट्रेेनों के गुजरने से कुछ हद तक यात्रियों को राहत मिली है, वहीं रेलवे को बंद राजस्व मिलना भी शुरू हो गया है। लेकिन पैसेंजर तथा कई अन्य ट्रेनों के संचालन बंद होने से यात्रियों को खासतौर पर स्थानीय यात्री जिसमें एमएसटी होल्डर भी शामिल है। उन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रेलवे की आय केवल दस फीसदी ही रह गई है।
बताते चले कि मऊ जंक्शन से प्रतिदिन दो हजार एमएसटी होल्डर सहित 10 हजार यात्रियों की आवाजाही से रेलवे को प्रतिदिन 10 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। लेकिन संचालन शुरू होने पर बमुश्किल प्रतिदिन 48 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। इस बाबत डीसीआई सिरनाम सिंह मीणा ने बताया कि यात्रियों की कमी के चलते राजस्व के ग्राफ में गिरावट आई है। अन्य ट्रेनों का संचालन शुरू होने पर राजस्व आना शुरू हो जाएगा।
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प्रतिदिन अपडाउन करते थे 2 हजार यात्री
आजमगढ़, बलिया, वाराणसी, बेल्थरा, भटनी, देवरिया आदि स्टेशनों पर लॉकडाउन से पहले रोजाना 2 हजार से ज्यादा यात्री अपडाउन करते थे। इनमें 70 फीसदी विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा 30 फीसदी छात्र, निजी कर्मचारी आदि शामिल थे। इनसे रेलवे को प्रतिदिन 30 हजार से ज्यादा का राजस्व प्राप्त होता था। रेलवे को बीते तीन माह में एमएसटी न बनने से 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उधर ट्रेनें बंद होने से एमएसटी होल्डर यात्री निजी वाहन या बस से गतंव्य स्थान पर आवागमन कर रहे हैं।
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