जिले के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को यूनिफार्म, जूते-मोजे व बैग के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के तहत मिलने वाली धनराशि में आधार कार्ड की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
शासन के निर्देश पर अब बच्चों के आधार कार्ड न होने पर भी डीबीटी तहत मिलने वाली धनराशि को उनके अभिभावकों के आधार कार्ड के माध्यम से भी सीधे खातों में भेज दी जाएगी। इससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी। बल्कि बच्चों को भी समय पर यूनिफार्म की सुविधा भी मिल सकेगी।
जिले में 1208 परिषदीय विद्यालयों में 1.30 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सरकार की तरफ से विद्यालयों में शत प्रतिशत नामांकन, ठहराव के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है।
योजना के तहत इन बच्चों को हर वर्ष दो सेट यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग आदि के लिए 1200 रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में भेजी जाती है।
इस राशि में 600 रुपये यूनिफार्म, 175 रुपये स्कूल बैग, 125 रुपये जूते- मोजे के अलावा स्वेटर के लिए 200 और स्टेशनरी के लिए 100 रुपये शामिल हैं। पहले कई बच्चों के आधार न बनने से उन्हें डीबीटी का लाभ नहीं मिल पाता था।
अधिकारियों के अनुसार 95 हजार बच्चों के अभिभावकों के खाते में डीबीटी के तहत धनराशि भेजी जा चुकी है। 25 हजार बच्चों का डाटा सत्यापन कर शासन को भेज दिया गया है।
इस बाबत जिला समन्वयक एमआईएस अवधेश कुमार सिंह ने बताया अब डीबीटी के लिए बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों का विवरण ही जरूरी है। बताया कि करीब 95 हजार बच्चों को डीबीटी का लाभ मिल चुका है।
25 हजार बच्चों का डाटा सत्यापन कर शासन को भेज दिया गया है। शेष बच्चों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही शत प्रतिशत बच्चों को लाभ दिला दिया जाएगा।