मऊ। आजादी मिलने के दशकों बाद भी जिले में सरकार की तरफ से इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना नहीं की जा सकी है। सरकार द्वारा जो तकनीकी संस्थान खोले भी गए हैं उनकी हालत दयनीय है। उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था के अभाव में मध्यम तथा गरीब तबके के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। आम बजट में वित्त मंत्री से युवाओं की अपेक्षाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है।
जिले में यूपी बोर्ड, आईसीएसई, सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों से हजारों छात्र प्रतिवर्ष 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान न होने से छात्र छात्राओं को महानगरों या गैर जिलों की ओर रुख करना पड़ता है। जिले में दो राजकीय तथा चार सहयता प्राप्त डिग्री कालेज हैं। इसके अलावा मान्यता प्राप्त डिग्री कालेज हैं। जनपद में लंबे अरसे से सरकार की ओर से इंजीनियरिंग, मेेडिकल कालेज सहित उच्च शिक्षण संस्थानों के खोले जाने की मांग की जा रही है। जिले में जो तकनीकी संस्थान खुले भी हैं उसमें भी संसाधनों का अभाव है।
इस संबंध में युवा प्रिस सिंह का कहना है कि जिले में उच्च व तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना न होने से काफी संख्या में छात्र छात्राएं उच्च तकनीकी शिक्षा से वंचित होना पड़ता है। आम बजट में इंजीनियरिंग तथा मेडिकल कालेज खोले जाने के लिए बजट की घोषणा की जाए। इसी क्रम में नेहाल वर्मा का कहना है कि जिले में दो राजकीय तथा पांच सहायता प्राप्त डिग्रीकालेजों में सीमित सीटें हैं। ऐसे में काफी संख्यामें छात्र छात्राओं को निजी कालेजों की तरफ रुख करना पड़ता है। आर्थिक तंगी के चलते गरीब तबके के छात्रों को शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो रहा है। राजकीय डिग्री कालेज खोले जाने के साथ ही संसाधन बढ़ाते हुए सीटों की संख्या बढ़ाया जाए।
इसी क्रम में मनीष शर्मा का कहना था कि जिले में पालीटेक्निक कालेज,आईटीआई खुला है लेकिन यहां संसाधनों का अभाव है। इससे छात्र छात्राओं को उद्योग के अनुरुप तकनीकी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। तकनीकी शिक्षण संस्थानों में इंडस्ट्री के अनुरुप संसाधन बहाल किया जाए। इसी क्रम में शमीम अहमद का कहना था कि शिक्षित युवा बेरोजगार रोजगार पाने की तलाश में हैं। यहां इंडस्ट्री लगाया जाए ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके।