जिला अस्पताल स्थित इमरजेंसी भवन।
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है। अस्पताल की इमरजेंसी सेवा भी इससे अछूती नहीं है। यहां ईएमओ का अभाव है। हालत यह है कि सामान्य चिकित्सक को इमरजेंसी मेडिकल अफसर (ईएमओ) बनाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। इससे दिनों-दिन हालात बिगड़ रहे हैं, पद के सापेक्ष चिकित्सकों की भारी कमी होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में वैसे भी चिकित्सकों का अभाव हैं और यहां उधारी चिकित्सकों पर इमरजेंसी से लेकर वार्ड समेत ओपीडी तक की जिम्मेदारी है। जिस अस्पताल के महत्वपूर्ण पद भी रिक्त पड़े हैं, वहां की चिकित्सा सेवा भगवान भरोसे है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इन दिनों तीन ईएमओ चाहिए, तब जाकर यहां का कार्य संभव हो सकेगा। यह तीनों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। जो अन्य चिकित्सक हैं, उनको ईएमओ बनाकर काम चलाया जा रहा। जबकि नियमों की बात करें, तो इमरजेंसी मेडिकल अफसर होना अनिवार्य है। कभी-कभी यह मामला फंस जाता है। यहां नियमों को ताक पर रख कार्य किया जा रहा। सीएमएस जिन चिकित्सकों की ड्यूटी ईएमओ के लिए लगा रहे उस पर भी विवाद है।
कोई चिकित्सक यह जिम्मेदारी नहीं उठाना चाहता। यही वजह है कि ड्यूटी लगने के बाद भी जिम्मेदार चिकित्सक ड्यूटी से नदारद रहता है। नतीजतन, इमरजेंसी में कार्य बाधित हो रहा। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के पदों पर नजर डालें तो यहां 29 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, जिसमें 16 चिकित्सकों की तैनाती है, इसमें भी कई चिकित्सक उधार के हैं। 13 पद अभी भी रिक्त पड़े हैं। जिसके भरने के लिए लखनऊ तक पत्र भेजे जा रहे हैं। परदहां ब्लाक के ताजोपुर निवासी पीयुष पांडेय ने बताया कि इमरजेंसी में मरीज को लेकर जाने पर कोइ चिकित्सक नहीं मिला। उन्हें इधर-उधर भागदौड़ करनी पड़ी। सुनने वाला कोई नहीं। वहीं डुमरांव गांव निवासी बृजेश सिंह ने बताया कि उन्हें भी मरीज को लेकर काफी भागदौड़ करनी पड़ी। लेकिन फौरन इलाज नहीं मिल सका।