मुहम्मदाबाद गोहना स्थित सीएचसी क्षेत्रीय लोगों स्वास्थ्य सेवाएं देने में विफल साबित हो रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के पांच पद खाली रहने के चलते गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए तीस बेड वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर हो गया है। अस्पताल के अंदर सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इसी से पता चलता है कि चार माह में महज आठ मरीज ही भर्ती किए गए हैं।
मुहम्मदाबाद गोहना मुख्यालय पर वर्ष 2002 में निर्मित 30 बेड की क्षमता वाला सीएचसी विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव झेल रहा है। कहने को तो अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, महिला रोग विशेषज्ञ, एमडी फिजीशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ व रेडियोलाजिस्ट समेत कुल छह चिकित्सकों का पद सृजित है लेकिन वर्तमान में केवल बाल रोग विशेषज्ञ को छोड़कर किसी की भी तैनाती नहीं है। सबसे अधिक अभाव महिला रोग विशेषज्ञ को लेकर बना हुआ है। हालत यह है कि सीएचसी निर्माण के 14 सालों के बाद कभी भी यहां पर महिला विशेषज्ञ चिकित्सक की पोस्टिंग नहीं हो सकी है। मौजूदा समय में महिला चिकित्सक सरोज वी प्रसाद की तैनाती कर किसी प्रकार से काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों की जगह निश्चेतना विशेषज्ञ व अस्पताल के अधीक्षक डा. एपी सिंह, डा. संतोष यादव, डा. एचएन सिंह चौहान, डा. आनंद कुमार और डा. बृजेश कुमार की तैनाती है। अस्पताल के अंदर की सुविधाओं पर नजर डाला जाए तो यहां एंटीबायोटिक दवाओं के साथ ही एनालजेसिक, कफ सीरप समेत एंटी रैबीज टीका प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। एक्स रे मशीन के अलावा खून व अन्य जांच के लिए सुविधा मौजूद है लेकिन विशेषज्ञ टेक्नीशियन के अभाव में जांच पर भरोसा करने वाले मरीजों की संख्या काफी कम है। अस्पताल की सेवाओं को देखते हुए सुविधा संपन्न लोग यहां आने की जहमत ही नहीं उठाते हैं। सफाई का आलम यह है कि शौचालय में गंदगी का अंबार है। वैक्सीन बाक्स खुलेआम अस्पताल की गैलरी में रखा रहता है। सरकारी अस्पताल में अप्रैल और मई में अभी तक अस्पताल में कुल 107 महिलाओं का ही प्रसव कराया गया है, जो काफी कम है। सबसे अहम बात यह है कि विगत चार महीने के भीतर अस्पताल में आठ मरीज ही भर्ती हुए हैं।
अस्पताल की सुविधाओं के बारे में पूछे जाने पर अधीक्षक डा. एपी सिंह ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव के अलावा सारी सुविधा उपलब्ध है। मौजूदा समय में पांच चिकित्सकों की तैनाती है जो पूरे समय तक मरीजों को सेवाएं देते हैं। टीबी के मरीजों के लिए डाट सुविधा के साथ ही डीडीटीएस के अंर्तगत टीकाकरण जननी सुरक्षा, नसबंदी आदि कार्यक्रम में काफी कार्य किया जा रहा है।