सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बाद भी सरकार की मंशा फलीभूत होते नजर नहीं आ रही है। असुविधाओं के बीच शिक्षा भी दम तोड़ रही है।
शिक्षा सत्र का चौथा माह बीतने को है, लेकिन जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल तक नहीं किया जा सका है। परिणाम है कि बच्चों को शुद्ध पानी भी मयस्सर नहीं हो पा रहा है। विभाग की तरफ से जल निगम को 150 हैंडपंपों की सूची भेजकर इतिश्री कर दी गई है। बिजली विहिन जर्जर भवनों में कक्षाओं का संचालन हो रहा है। अभिभावक अपने लाडलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि दर्जनों विद्यालयों में बच्चों का नामांकन कागज में तो ज्यादा दिखाया गया है, लेकिन गुरुवार को नामांकन के सापेक्ष बच्चों की उपस्थिति नाम मात्र ही दिखी। सब कुछ जानते हुए विभागीय अधिकारी मौन हैं।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। आरटीई के तहत समस्त परिषदीय विद्यालयों में बिजली, पेयजल, शौचालय सहित विभिन्न बुनियादी सुविधाओं को बहाल करना अनिवार्य किया गया है, लेकिन अभी तक विद्यालयों में सुविधाओं को बहाल करने के मामले में विभागीय अधिकारी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। लगभग 90 प्रतिशत शौचालय उपयोग करने लायक ही नहीं हैं। प्रदूषित पानी का सेवन करने से बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। विद्यालयों में शौचालय के अभाव में बालिकाएं स्कूल जाने से ही कतराती हैं। वर्षो से जर्जर भवनों में विद्यालयों का संचालन हो रहा है।
अभिभावक, बच्चे व अभिभावक दहशत में जी रहे हैं। जिला समन्वयक निर्माण अजीत तिवारी के अनुसार जिले के 80 परिषदीय विद्यालयों के भवन जर्जर हाल में हो गए हैं। जबकि 70 विद्यालयों के भवन की छत से पानी टपकता है। शैक्षिक परिवेश बेहतर न होने से बच्चों के नामांकन में प्रतिवर्ष कमी आ रही है। कागज पर तो बच्चों का नामांकन ज्यादा दिखा दिया गया है, लेकिन उपस्थिति नाम मात्र रह रही है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2014 में 1,72,617 बच्चों का नामांकन किया गया था। जबकि वर्ष 2015 में 1,64,588 बच्चों का नामांकन हुआ था। शिक्षकों की संख्या लगभग पांच हजार है।