समाज में हर वर्ग के व्यक्ति को बराबरी का स्थान मिलना चाहिए। संविधान में आजादी दी गई है लेकिन हकीकत में सामाजिक व आर्थिक गुलामी से अभी हम उबर नहीं पाए हैं। इसे दूर करने की जरूरत है। यह बात उत्तर प्रदेश विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रवींद्र सिंह ने रविवार को कही। वे हिंदी भवन में सामाजिक न्याय सम्मेलन की ओर से आयोजित ‘भारतीय संविधान के परिप्रेक्ष्य में दलितों, पिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों को आरक्षण एवं स्थिति व चुनौती’ विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे। ।
उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े व अल्पसंख्यक समाज की अनदेखी करना उचित नहीं है। उनकी ऊर्जा का उपयोग किए बगैर देश प्रगति नहीं कर सकता है। ऐसे में उनकी उपेक्षा करना उचित नहीं है। हमें गुलामी की मानसिकता से उबरना होगा।
उन्होंने कहा कि हक मांगने नहीं बल्कि छीनने से मिलता है। आज न्यायपालिका काफी कुछ तय कर रही है। नौकरियों में आरक्षण को सही तरीके से लागू करने की वजह से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को न्यायपालिका को हटना पड़ा। अगर आरक्षण सही तरीके से लागू हो तो समाज में परिवर्तन होगा। मगर कुछ लोग ऐसा होने नहीं देना चाहते।
उन्होंने कहा कि अपना हक पाने के लिए संघर्ष करना होगा, कुर्बानी देनी होगी, नहीं तो अधिकार नहीं मिलेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सहकारिता अधिकरण के अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह यादव ने कहा कि देश की व्यवस्था पर 15 प्रतिशत ऊंची जाति के लोगों का कब्जा है।
संविधान में समानता का अधिकार मिला हुआ है, लेकिन 85 प्रतिशत लोगों को समानता का अधिकार प्राप्त नहीं है। इस मौके पर आबादी के हिसाब से आरक्षण की मांग की गई। पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयप्रकाश यादव, विरेंद्र बहादुर पाल, रामकृत यादव, मकरध्वज यादव, श्रीप्रकाश यादव, दीनानाथ यादव, महेंद्र यादव, वीरेंद्र बहादुर पाल, डा. मनोज यादव, तेजबहादुर यादव, निर्मला यादव , विजयशंकर यादव आदि ने अपना विचार व्यक्त किया। संचालन केके यादव ने किया।