नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की आराधना की गई। मंदिरों में श्रद्घालुओं ने कालरात्रि देवी के स्वरूप की पूजा अर्चना किया। जबकि पंडालों में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं के पट पूजन अर्चन के बाद खुल गए।
नगर के शीतला धाम स्थित मां शीतला देवी मंदिर पर श्रद्घालुओं की भारी भीड़ रही। इसी प्रकार वनदेवी सहित जिले के सभी मंदिरों में भगवती कालरात्रि की पूजा अर्चना की। साधकों ने इस अवधि में कई अनुष्ठान और साधना किए। जिले के प्राचीन और ऐतिहासिक शीतला धाम पर सुबह से ही श्रद्घालु महिला पुरुषों की कतारें मां के दर्शन के लिए लग गई। सुबह से शाम तक हजारों भक्तों ने मां के दर्शन कर आशीर्वाद लिए। भक्तों ने मां को नारियल चुनरी चढ़ाया।
घी और कपूर से मां की आरती किया। इसी प्रकार वनदेवी धाम पर मां के दर्शनों के लिएआस पास के क्षेत्रों और पड़ोसी जनपदों से आने वाले श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। नगर के रोडवेज, आजमगढ़ मोड़, मुंशीपुरा स्थित दुर्गा मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक मां के दर्शन पूजन आरती, आराधना, देवी सूक्तों के उच्चारण और जयकारों से सारा माहौल देवी मय रहा। इधर पंडालों में दुर्गा प्रतिमाओं के दर्शन पूजन शुरु हो गए। सायं होते ही श्रद्घालुओं का रेला देवी के दर्शनों के लिए निकल पड़ा। भक्तगण पंडालों पर की गई भव्य सजावट और मां की मनोहर मूर्ति देखते ही मुग्ध हो रहे हैं।
सदर चौके से लेकर रौजा, बालनिकेतन, भीटी , सहादतपुरा , हिंदी भवन और काटन मिल ,बहादुर गंज रोड सहित सभी दुर्गा पूजा पंडालों पर दर्शकों की भारी भीड़ रही । कोपागंज इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों के सभी दुर्गा मंदिरों में श्रद्घालुओं और साधकों ने साधना की। कोरौली में हजारों श्रद्घालुओं ने मां के दर्शन किए।
कसारा के खजुरहट पुरवे में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना के बाद पंडित सूर्यनाथ पांडेय ने पूजन अर्चन के बाद नेत्र खोला। इसके बाद सैकड़ों श्रद्घालुओं ने मां के दर्शन किए। यहां नृसिंट मंदिर पर दुर्गा प्रतिमा के पट मंगलवार को खोले जाएंगे। दोहरीघाट संवाददाता के अनुसार कसबे , गोंठा, सियरही सहित आस पास के मंदिरों में श्रद्घालुओं की भारी भीड़ रही।
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मातेश्वरी धाम के प्रांगण में सद्गुरु जी महाराज ने ध्यान योग शिविर में सैकड़ों श्रद्घालुओं को ध्यान योग कराया। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्घालुओं से कहा कि वे ढोंग और आडंबरों से सर्वथा दूर रहकर अपनी दिनचर्या सदाचरण के साथ निभाएं। सबसे प्रेम करें। प्रेम से ही ईश्वर तक को पाप्त किया जा सकता है।
मानव की सोच जब शुद्घ-पवित्र और परोपकारी रहती है तो उसका सभी प्रकार से मंगल ही होता है। गुरु की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरु ही प्राणी को दुर्गुणों से बचाता है। उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
गुरु कभी अपने शिष्यों का अहित नहीं होने देता । स्वयं कष्ट सहकर भी शिष्य को कष्टों से बचाता है। उन्होंने दुर्व्यसनों से सर्वदा दूर रहने की सलाह देते हुए उसे मानव के इहलोक और परलोक के लिए जरूरी बताया। मानव कल्याण के लिए सदाचरण बहुतहरी अनिवार्य है।
गुरु ने कहा कि आचरण से प्राणी को देव और दनुज की श्रेणी प्राप्त होती है। इसलिए मावन को सदैव सदाचरण का अनुसरण करना चाहिए कभी भी झूठी चकाचौंध के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य रूप से विजय बहादुर यादव , सुधा देवी , शकुंतला देवी, कमलेश यादव , सुदर्शन, संगीता देवी, भृगु, रामाश्रय , फूलचंद, मनोज यादव, मंजू, शशि राय, शांति देवी, नितेश्वर यादव , रण् विजय और भीमानंद आदि सैकड़ों भक्तों ने ध्यान योग शिविर में भाग लिया।