जनपद के सूखा पीड़ित कितने किसानों को कितना मुआवजा दिया गया इसका कोई लेखाजोखा जिला मुख्यालय पर नहीं हैं। वितरण का विवरण एनआईसी की वेबसाइट पर भी नहीं अपलोड है।
सरकार की गाइड लाइन के अनुसार 13,500 रुपये एकड़ की दर से अधिकतम दो एकड़ तक के किसानों को 27 हजार रुपये सूखा राहत देने का प्रावधान है। लेखपालों को किसानों के खेतों के विवरण और सूखे से हुई क्षति का आंकलन करके रिपोर्ट देने का निर्देश दिसया गया।
लेखपालों पर आरोप है कि सुविधा शुल्क लेकर कम जोत वाले किसानों को अधिक सूखा राहत और कम जोत वाले किसानों को अधिक रकम देने की रिपोर्ट लगा दिया। इसकी वजह से वास्तविक सूखा पीड़ित हजारों किसान सूखा राहत राशि पाने से वंचित रह गए। जिला प्रशासन के अनुसार अब तक कुल 68 करोड़ 62 लाख रुपयों का वितरण सूखा राहत के रूप में किसानों को किया जा चुका है।
किसान नेता देवप्रकाश राय और राकेश सिंह , किसान सभा के देवेंद्र मिश्र सहित अनेक किसान नेताओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि जिन किसानों को सूखा राहत वितरित की गई है , उनका सूखा से प्रभावित क्षेत्रफल और सूखा राहत आदि पूरा विवरण एनआईसी की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।
लेकिन इसे अब तक अपलोड नहीं किया गया है।किसान नेता देवप्रकाश राय का तर्क है कि सूखा राहत का वितरण कार्य पूरा हुए लगभग एक महीने से भी अधिक समय बीत गया है लेकिन किसान संगठनों की लगातार मांग के बावजूद इसे अब तक एनआईसी पर अपलोड न करना जिला प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है।
किसानों को पिछले वर्ष की सूखा राहत राशि अब तक नहीं मिल पाई है। बरसात शुरू हो गई है, किसानों को पैसा नहीं मिलने की वजह से कर्ज लेकर खेती करनी पड़ेगी। वे सूखा राहत राशि के लिए अफसरों के दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं।