दोहरीघाट पंप कैनाल तथा शारदा सहायक खंड 32 मुख्य नहर सहित दर्जनों माइनरें किसानों के लिए सफेद हाथी साबित हो रही हैं। जायद की फसल के पीक सीजन में नहरें तथा माइनरों की तली में ही पानी होने से गर्मी की बोई गई सब्जी तथा जायद की फसल सूख रही है। हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा व धान की नर्सरी की तैयारी प्रभावित हो रही है। लोगों ने आला अधिकारियों को अवगत कराया बावजूद नहर में पानी छोड़ने की जहमत तक नहीं उठायी जा सकी है।
जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 145395.42 हेक्टेयर है। सिंचाई के लिए जिले में चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट, लघु डाल खुरहट पंप कैनाल, शारदा सहायक लिंक नहरें हैं। इसके अलावा लघु डाल पंप कैनाल, पकड़ी कैनाल पंप नहर हैं। प्रमुख नहरों की 70 माइनरें हैं। नहर तथा माइनरों में मानक के अनुरूप पानी न छ़ोड़े जाने से कुलाबों के नीचे पानी रह जा रहा है। मधुबन तहसील की माइनरों में तो तली में पानी है।
सिंचाई के अभाव में उर्द, मूंग, भिंडी, करैली, तरबूजा, ककड़ी, खीरा, गन्ना सहित जायद की फसल सूख रही हंै। अधिकारियों की मानें तो दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र के गोठा स्थित विद्युत उपकेंद्र का ट्रांसफार्मर जलने तथा दोहरीघाट पंप कैनाल के पैनल में तकनीकी फाल्ट आने से कई दिनों तक कैनाल बंद हो गई थी।
शारदा सहायक खंड-32 में महीनों से पानी नहीं आ रहा है। इस संबंध में किसान संजय सिंह, रामसुधार पांडेय, जयनारायण शर्मा का कहना है कि सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों के लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। नहर व माइनरों में पानी न आने से बढ़ती तपिश से गन्ना सहित जायद की नगदी फसल सूख रही हैं। कहा कि नहर में अविलंब पानी नहीं छोड़ा गया तो हमलोग चक्काजाम करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।