चार दिन पहले मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के कमालपुर पहाड़पुर निवासी दुरविजय राजभर और रामप्यारे राजभर की बकरियों पर लावारिस कुत्तों ने हमला कर दिया। वहीं, इस घटना से एक दिन पहले सदोपुर निवासी सुनीता देवी को लावारिस कुत्तों ने हमला कर घायल कर दिया था।
यह तो सिर्फ ताजा मामले हैं। इसके अलावा लावारिस कुत्तों के बाइक के पीछे भागने से सड़क हादसे भी हुए हैं। जिला अस्पताल में सोमवार को 85 लोग रैबिज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे, जिनमें 30 नए मरीज थे। जिला अस्पताल के डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तेज धूप और गर्मी के तनाव के कारण कुत्तों में चिड़चिड़ापन और हार्मोनल बदलाव (जैसे कोर्टिसोल स्तर में वृद्धि) होते हैं।
बीते दस दिन में 310 नए मरीज डॉग बाइट की घटना के बाद इलाज कराने पहुंचे हैं। यह केवल एक सरकारी अस्पताल का आंकड़ा है। यदि इसमें सीएचसी और निजी अस्पतालों का आंकड़ा जोड़ दिया जाए तो यह ग्राफ प्रतिदिन लगभग 200 तक पहुंच जाता है।
नगर पालिका की लापरवाही के चलते सड़कों और चौराहों पर कुत्तों के झुंड देखे जा रहे हैं। नियमानुसार पशुपालन विभाग और नगर निकायों को संयुक्त रूप से कुत्तों की नसबंदी व नियंत्रण की व्यवस्था करनी होती है, लेकिन जिले में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रही है।
जिला अस्पताल के एंटी रैबिज कक्ष के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 70 से 80 मरीज एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 80 प्रतिशत मामले कुत्ते के काटने के हैं, जबकि शेष मामले सियार, बंदर, बिल्ली और अन्य जानवरों के हैं। बीते 21 मई से सोमवार दोपहर तक 921 लोगों ने एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाया, जिनमें 310 नए मरीज शामिल हैं।
अप्रैल माह में 2000 लोगों ने एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाया था। इसके अलावा कई लोग निजी अस्पतालों में भी इलाज कराते हैं। यदि निजी अस्पतालों का आंकड़ा जोड़ा जाए तो प्रतिदिन कुत्ता काटने के मामले 200 तक पहुंच सकते हैं। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे होते हैं, जिनमें 12 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं।
हर वर्ष कुत्ता काटने के मामलों में वृद्धि हो रही है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में नौ हजार से अधिक, 2024 में 8500 से अधिक, 2023 में 8200 से अधिक और 2021 में सात हजार से अधिक लोगों ने एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाया था।
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हर जिले में एबीसी सेंटर अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा/लावारिस कुत्तों के मानवीय प्रबंधन और जनता की सुरक्षा के लिए हर जिले में कम से कम एक ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी)’ सेंटर बनाने के निर्देश दिए हैं। इन केंद्रों में बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारी होना अनिवार्य है, लेकिन यह व्यवस्था अभी तक नगर पालिका मऊ और अन्य निकायों की फाइलों तक ही सीमित है।
कोट-
नगर में आवारा कुत्तों को लेकर अभियान चलाया जाएगा। साथ ही पशुपालन विभाग से समन्वय कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा। एबीसी सेंटर के लिए स्थान चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है। - दिनेश कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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पशुपालन विभाग के पास संसाधनों की कमी है। यदि निकाय आवारा जानवरों को पकड़कर सूचित करें तो नसबंदी अभियान चलाया जा सकता है। -डॉ. सीपी कुशवाहा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी