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गर्मी बढ़ने के साथ बढ़ेे कुत्ता काटने के मामले

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जिला अस्पताल के ओपीडी में एंटी रैबिज कक्ष में मरीज को वैक्सिन लगाते स्वास्थकर्मी।संवाद - फोटो : MAU
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मऊ। गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में कुत्ता काटने के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पताल में रोजाना ऐसे 50 से अधिक लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। अप्रैल माह में अब तक एक हजार से अधिक मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। यह आंकड़ा केवल जिला अस्पताल का है, जबकि दस सीएचसी तथा निजी अस्पतालों के आंकड़ें शामिल होने से ग्राफ और बढ़ जाएगा। कुत्तों को पकड़ऩे के लिए पालिका के गैरजिम्मेदाराना रवैये से सड़कों एवं चौराहों पर कुत्तों के झुंड देखने को मिल रहे हैं। नियमानुसार पशु पालन विभाग तथा नगर पालिका के साथ सभी निकायों के जिम्मेदारों को साथ मिलकर संयुक्त रूप से इस समस्या को रोकते हैं। पशु पालन विभाग निकायों की मदद से कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी करता है। लेकिन जिले में ऐसा न तो नगर पालिका के जिम्मेदार कर रहे हैं और न ही जिले के दूसरे नौ निकायों के जिम्मेदार। ऐसे में जिले में कुत्तों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जिला अस्पताल के एंटी रैबिज कक्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन 45 से 60 मरीज एंटीरैबीज लगवाने पहुंच रहे है। इसमें 80 फीसदी मामले कुत्ता काटने के हैं, शेष सियार, बंदर, बिल्ली सहित दूसरे जानवरों के। बीते मार्च में ही 1150 लोगों ने अस्पताल पहुंचकर एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाया। वहीं अप्रैल माह में 14 तारीख तक 925 लोग इंजेक्शन लगवा चुके है। इसके अलावा बहुत से लोग निजी अस्पतालों में एंटी रैबिज लगवाने को प्राथमिकता देते हैं। इन अस्पतालों का आंकड़ा जोड़ दें तो प्रतिदिन कुत्ता काटे के 80 मामले तक पहुंचने की संभावना है। जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में 40 फीसदी बच्चे हैं। इसमें 12 से 14 बच्चें डॉग बाइट्स के शिकार होते है। हर वर्ष कुत्ता काटने के मामले बढ़ रहे हैं। 2021 में जिला अस्पताल में एंटी रैबिज लगवाने की संख्या सात हजार से ज्यादा थी। 2020 में यह आठ हजार के करीब था। संक्रमण के चलते यह ग्राफ कम रहा। 2019 में 11, 213 जबकि 2018 में सात हजार से ज्यादा थी। इस साल चार माह में दो हजार से ज्यादा आंकड़ा पहुंच चुका है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि नगर में अवारा कुत्तों को लेकर अभियान चलाया जाएगा, साथ ही इस संबंध में पशु पालन विभाग से भी बातचीत कर इस समस्या का समाधान का प्रयास किया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एम प्रसाद ने बताया कि पशुपालन विभाग के पास संसाधनों की कमी है, निकायों द्वारा इन जानवरों को पकड़कर सूचित करें तो नसबंदी अभियान चलाया जा सकता है।
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