गैर इरातदन हत्या, जालसाजी और इंडियन मेडिकल कौंसिल एक्ट के मामले में आरोपी डॉक्टर नगमा खां उर्फ नगमा खातून ने मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। सीजेएम डॉ. केपी सिंह ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जेल भेज दिया। इस दौरान आरोपी डॉक्टर की ओर से जमानत के लिए अर्जी दी गई। जिसे सुनवाई के बाद सीजेएम ने जमानत अर्जी खारिज कर दिया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा इलाज के लिए अपनी पत्नी लक्ष्मी देवी को 10 मार्च 24 को शिफा अस्पताल में भर्ती किया था। जहां डॉ. नगमा खां उर्फ नगमा खातून उसका इलाज कर रही थी। वादी का कथन है डॉक्टर ने कहा कि उसका प्लेटलेट्स कम हो गया है। डॉक्टर ने उसकी पत्नी को रात्रि में 10 बजे इंजेक्शन लगाया, इस दौरान वादी की पत्नी की मौत हो गई। जांच में अधिकारियों ने पाया कि उक्त अस्पताल सीएमओ कार्यालय में रजिस्टर्ड नहीं था। मामले में आरोपी बलिया जनपद के गड़वार थाना क्षेत्र के सरैया गांव निवासी डॉ. नगमा खां उर्फ नगमा खातून पुत्री बदरे आलम ने मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया। सीजेएम ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जेल भेज दिया। इस दौरान डॉक्टर नगमा खां की ओर से उनके अधिवक्ता ने जमानत के लिए अर्जी दी। जिसे सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।