स्वच्छता अभियान अभी तक परवान नहीं चढ़ सका है। अभियान को लेकर जागरूकता तो हुई परंतु लोग इसे स्थायी रूप से धरातल पर उतार नहीं सके। अभियान के शुरूआत में नेताओं के अलावा आम लोगों ने भी हाथ में झाडू उठा लिया परंतु यह क्रम अधिक दिनों तक टिक नहीं सका। शुरूआती दौर में गांव से लेकर शहर तक लोग हाथों में झाडू लेकर कैमरे की तरफ टकटकी लगाए रहते थे।
इस अभियान में आम लोगों के अलावा प्रशासनिक अमला भी बढ़-चढ़ कर अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराया था। लेकिन समय के साथ लोगों का उत्साह भी धीरे-धीरे ठंडा पड़ता चला गया। केंद्र सरकार तो 2019 तक संपूर्ण भारत को चमचमाने का सपना संजोए हुए है। लेकिन दो वर्ष के अंदर ही यह योजना जमीन पर औंधे मुंह नजर आ रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा, यक्ष प्रश्न के रूप में सामने है।