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डीएम का फरमान बेअसर: पशु आश्रय स्थलों पर नहीं बन रहा वर्मी कंपोस्ट

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मऊ। जिला प्रशासन की तरफ से पशु आश्रय स्थलों की आय बढ़ाने के लिए वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए पशुपालन विभाग सहित समस्त खंड विकास अधिकारियों को फरमान जारी किया गया था। लेकिन एक वर्ष बाद भी वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है। पशुपालन विभाग के अधिकारी खंड विकास अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी बताकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। जिले में बनाए गए 23 अस्थायी पशु आश्रय स्थल बदहाल पड़े हैं। पशु आश्रय स्थलों पर संसाधनों का अभाव है। विभागीय अभिलेखों में 1516 छुट्टा पशु रखे गए हैं। जबकि गांवों में सैकड़ों छुट्टा पशु किसानों की मेहनत कमाई की फसल को तहस नहस कर दे रहे हैं। जिलाधिकारी ने पशु आश्रय स्थलों की आय बढ़ाने के लिए वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए पशुपालन विभाग सहित समस्त खंड विकास अधिकारियों को गत वर्ष फरमान जारी किया था। अधिकारियों की मानें तो एक छुट्टा पशु दिन भर में चार किग्रा गोबर करता है। सभी पशु आश्रय स्थलों से वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम शुरू हो जाता है तो कम से कम प्रतिदिन 60 कुंतल वर्मी कंपोस्ट तैयार होने लगेगा। वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए गड्ढे खुदवाने के साथ ही शेड बनाया जाना था। आधा अधूरा काम कर खानापूर्ति कर दी गई है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो शेड निर्माण न होने की स्थिति में वर्मी कंपोस्ट के लिए गोबर में केेचुए डालने पर कुछ समय बाद मर जाएंगे। ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी तथा खंड विकास अधिकारियों द्वारा रुचि न लिए जाने मामला लटका पड़ा है। जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से इजाफा होने से किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। पशु आश्रय स्थलों पर संसाधनों का अभाव रहने से पशु आश्रय स्थलों पर नाम मात्र छुट्टा पशु रखे गए हैं। जिलाधिकारी ने गत सात अक्तूबर 2019 को समीक्षा बैठक में लापरवाही मिलने पर सभी बीडीओ, सेक्रेटरी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित सभी पशु चिकित्साधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इस बाबत मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि पशु आश्रय स्थलों पर शेड नहीं बनाया जा सका है। इसके चलते वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम शुरू नहीं किया जा सका है। खंड विकास अधिकारियों तथा ग्राम प्रधानों को सभी कार्य कराना है। पत्र लिखा गया है।
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