मऊ। आखिरकार लंबे समय बाद जिला अस्पताल में पुलिस चौकी बन ही गई। पुलिस चौकी का संचालन होने से जिला अस्पताल ओपीडी, इमरजेंसी में अराजकतत्वों का जमावड़ा नहीं हो पाएगा। चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी भयमुक्त होकर ड्यूटी कर सकेंगे। अमर उजाला ने कई बार समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिले की आबादी 25 लाख है। जिला अस्पताल में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ पीआरडी के जवानों की तैनाती रहती थी। यहां आए दिन इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंचने वाले मरीजों द्वारा चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मी से अभद्रता के मामले होते थे। इतना ही नहीं गत वर्ष उपचार कराने के लिए गए कुछ मनबढ़ों द्वारा इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे एक चिकित्सक से अभद्रता करने के साथ हवाई फायरिंग की थी। इसके अलावा एक किशोर की मौत से नाराज परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। वहीं रात में ड्यूटी करने के दौरान चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी दहशत में रहते हैं। पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की मांग पर पुलिस चौकी के संचालन करने का निर्णय लिया। पुलिस चौकी में एक सब इंसपेक्टर, एक हेड कांस्टेबिल, दो आरक्षी की तैनाती की गई है। पुलिस चौकी का संचालन होने से चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मी भयमुक्त कार्य कर सकेंगे। जिला अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था न होने से इमरजेंसी या ओपीडी में इलाज कराने के दौरान मरीजों के तीमारदार और स्वास्थ्यकर्मियों में विवाद आम बात है। इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान यह घटना ज्यादा होती है। पूर्व में एक चिकित्सक पर एक मनबढ़ युवक ने हवाई फायरिंग कर चुका है, इस घटना के बाद चिकित्सकों ने एक स्वर में सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी। जिस पर पुलिस ने संबंधित आरोपी पर कार्रवाई करते हुए पुलिस चौकी बनाने की कवायद शुरू कर दिया था।