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जिला अस्पताल अधर में महिलाओं की दुर्गति

Wed, 04 Oct 2017 11:21 PM IST
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अस्पताल की नर्स जीना ने नौकरी से न‌िकाले जाने के बाद हाथ की नस काट क‌िया था सुसाइड का प्रयास - फोटो : अमर उजाला
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मऊ। जिला महिला अस्पताल का समय से पूरा हो पाना संभव नहीं दिख रहा है। धीमी गति से काम होने पर जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र ने निर्माण निगम को नोटिस जारी कर इस संबंध में जबाब तलब भी किया। इसके बाद भी निर्माण कार्य में सुधार नहीं दिख रहा। 17 दिसंबर 2017 तक हैंड ओवर के अनुबंध पर बन रहे अस्पतल  में इस वक्त कमरों की दीवारों की जुड़ाई का काम चल रहा है। अभी ऊपरी तल का निर्माण होना बाकी है। अब तक केवल 50 प्रतिशत निर्माण कार्य हुआ है। निचले तलों पर फिनीशिंग का कोई काम शुरू ही नहीं किया जा सका है। सूत्रों से पता चला कि बजट के अभाव में कार्य बाधित रहा। जबकि प्रोजेक्ट प्रबंधक पीएन सिंह का कहना है कि देर से काम शुरू हुआ। इसके चलते ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है।  
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 पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में जिला मुख्यालय स्थित जिला महिला अस्पताल के निर्माण के लिए शासन से  स्वीकृत हुआ। 100 बेड का जिला महिला अस्पताल  के निर्माण के लिए शासन से 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। अस्पताल भवन चार मंजिला बनना है। अस्पताल के निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को दिया गया। शुरुआती दौर में ही काम काफी धीमी गति से शुरु हुआ। निचले तल के निर्माण में ही लगभग एक साल का समय लग गया। इस अस्पताल का निर्माण दिसंबर 2017 में पूरा कर दिया जाना था। लेकिन काम की गति से  काफी धीमी चल रही है। इधर नोट बंदी के बाद और ट्रकों के ओवरलोड  पर सख्ती के बाद से मोरंग बालू और गिट्टी के दाम आसमान पर जाने के दौरान निर्माण कार्य कई महीने से बंद है। इधर समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार ने निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर को कई बार फटकार लगाया और निर्माण कार्य हर हाल में नियत समय पर पूरा करने की हिदायत दिया था। लेकिन निर्माण कार्य काफी दिनों से बहुत ही मंद गति से चल रहा है। निर्माण कराने वाली कंपनी जतीन बिल्ड टेक का कहना है कि पहले तो मोरंग बालू और गिट्टी के दामों में भारी वृद्धि कर वजह से भी निर्माण कार्य पर असर पड़ा है। इधर बजट के अभाव के चलते भी कार्य प्रभावित हो रहा है। इधर काफी दिनों से काम बंद है। निर्माण कार्य का हाल यह है कि अभी तक तीसरी मंजिल की छत की ढलाई की गई है। ऊपरी मंजिल के लिए पिलर ढालने का काम चल रहा है। इसके अलावा अस्पताल भवन के कमरों के पार्टीशन और प्लास्टर होना बाकी है। इसके बाद रंगाई पुताई, पेंटिंग , वायरिंग , प्लंबरिंग सहित फिनिशिंग के सारे काम बाकी है। निर्माण कार्य को देखते हुए ऐसा कत्तई नहीं लगता कि दिसंबर माह में इस अस्पताल का निर्माण पूरा हो पाएगा।  
इनसेट
परित्यक्त भवन में चलता है अस्पताल
महिला अस्पताल का भवन न होने के चलते वर्तमान में जिला संयुक्त चिकित्सालय के परत्यक्त भवन में इसका संचालन हो रहा है। इस भवन को पीडब्ल्यूडी ने खतरनाक घोषित करते हुए इसे ध्वस्त कराने की सलाह दे रखी है। इसके बावजूद इस जर्जर बिल्डिंग में अस्पताल का संचालन हो रहा है। भवन के अभाव में ओटी नहीं चल पाती है।जान जोखिम में डालकर कर्मचारी ड्य्यूटी करते हैं और मरीजों की भी जान खतरे में ही रहती है। इस बिल्डिंग के जर्जर हिस्से प्राय: गिरते रहते हैं।  
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कोट  
निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक पीएन सिंह ने बताया कि देर से काम शुरू किया जा सका। इसके चलते देर होना स्वभाविक है। बोले पूरी उम्मीद है मार्च 2018 तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
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