मऊ। जिला अस्पताल में पहुंचने वाले किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को डायलिसिस की सुविधा समय से जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रही है। डायलिसिस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। डायलिसिस सेंटर पर क्षमता से छह गुना अधिक 183 वेटिंग चल रही है। जबकि रोज 28 से 30 मरीजों की तीन शिफ्ट में सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक डायलिसिस हो रही है।
जिला अस्पताल में मरीजों के डायलिसिस के लिए चार सितंबर 2021 में दीपचंद डायलिसिस सेंटर की स्थापना पीपीपी मॉडल पर की गई है। उस समय छह मशीनें लगाई थीं। मई 2023 में चार नई मशीन लगाई गई, इससे डायलिसिस सेंटर और अधिक मरीजों का डायलिसिस का लाभ मिलने लगा। यहां पर जनपद के साथ पड़ाेस के गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और बलिया से भी मरीज आकर डायलिसिस करा रहे हैं। इस महीने में 183 मरीज डायलिसिस के लिए कतार में खड़े होकर अपनी बारी का प्रतिक्षा कर रहे हैं। डायलिसिस सेंटर के मैनेजर वशिष्ट कुमार ने बताया कि सितंबर में 163 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया। अक्तूबर में इनकी संख्या 178 पर पहुंच गई। नवंबर में प्रतीक्षा सूची 180 पर पहुंच गई है। नवंबर माह में 780 मरीजों की डायलिसिस हुई थी। वहीं दिसंबर माह में अब तक 240 मरीजों की डायलिसिस हो चुकी है, तो 185 मरीज वेटिंग चल रहीं है। बेड सीमित मात्रा में होने से मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यहां मात्र 10 बेड होने की वजह से मरीजों की लंबी कतार लगी है। रोजाना यहां पर 28 से 30 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। अस्पताल प्रशासन ने दस और बेड बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। आने वाले दिनों में दस और बेड लगने से सेंटर में रोजाना 63 मरीजों की डायलिसिस होगी। जबकि हर माह यहां करीब 1800 मरीजों की डायलिसिस की जा सकेगी।
-
कैसे हाेती है मरीज की डायलिसिस
मरीज को डायलिसिस के लिए किसी किडनी के डॉक्टर का रेफर पर्चा अनिवार्य होता है। जिस पर चिकित्सक के डायलिसिस कराने की परामर्श होता है। चिकित्सक की सलाह के बाद मरीज का सेंटर पर पंजीकरण किया जाता है। मरीज को आधार कार्ड के साथ दो फोटो लाना अनिवार्य होता।
जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में 10 नई मशीन का प्रस्ताव दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद ही मशीन लगाई जाएंगी। इससे अधिक मरीजों का लाभ मिलेगा।
- डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल