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Mau News: 365 वेटिंग के कारण तीन महीने से नहीं हो रही नए मरीजों की डायलिसिस, अब पांच शिफ्ट में होगी डायलिसिस

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जिला अस्पताल में दस बेड की डायलिसिस यूनिट में 365 से ज्यादा वेटिंग के चलते बीते तीन महीने से नए मरीजों की डायलिसिस नहीं हो पा रही है। अब डीएम ने खुद इसके लिए शासन के साथ डायलिसिस यूनिट की संस्था से पत्राचार किया है।
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बेड न बढ़ने तक डायलिसिस यूनिट को तीन की जगह पांच शिफ्ट में संचालित करने का निर्देश दिया है। ऐसे में दो शिफ्ट में डायलिसिस होने से वेटिंग के 45 फीसदी कही होने की संभावना है।
इससे पहले अस्पताल प्रबंधन द्वारा चार बार इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज चुका है। जिला अस्पताल में मरीजों के डायलिसिस के लिए चार सितंबर 2021 में दीपचंद डायलिसिस सेंटर की स्थापना पीपीपी मॉडल पर की गई है।
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उस समय छह मशीनें लगाई गई थीं। मरीजों की वेटिंग बढ़ने पर मई 2023 में चार नई मशीन लगाई गईं, इससे सेंटर पर और मरीजों का डायलिसिस का लाभ मिलने लगा है।
वर्तमान में किडनी के मरीजों में करीब 30 फीसदी का ग्राफ बढ़ने और निशुल्क डायलिसिस की सुविधा होने के चलते सीमावर्ती जिला बलिया और गाजीपुर के मरीजों द्वारा भी यहां डायलिसिस कराने को लेकर यह बेड संख्या भी कम हो चुकी है।
दीपचंद्र डायलिसिस सेंटर के मैनेजर वशिष्ठ कुमार ने बताया कि वर्तमान में 365 वेटिंग है, इससे नए मरीज करीब तीन माह से नहीं लिया जा रहा है। वर्तमान में तीन शिफ्ट में 30 मरीजों की डायलिसिस हो रही है।
उधर, इस संबंध में सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता द्वारा जारी निर्देश में अब डायलिसिस पांच शिफ्ट में करना है। सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि डायलिसिस यूनिट में वेटिंग को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है।
डीएम प्रवीण मिश्र ने खुद इस मामले में शासन और संबंधित संस्था को दस और बेड बढ़ाने के साथ दो शिफ्ट में अतिरिक्ति डायलिसिस करने के लिए पत्राचार किया गया है। बेड न बढ़ने पर जब तक दो अतिरिक्त शिफ्ट में डायलिसिस कराने की योजना तैयार की जा चुकी है।

दो बार प्रभारी मंत्री के समक्ष भी उठ चुका है वेटिंग का मुद्दा
डायलिसिस में लंबी वेटिंग का मुद्दा जिले के प्रभारी मंत्री गिरिशचंद्र यादव के समक्ष दो बार उठ चुका है। इसमें पहली बार बीते मई 2025 में बैठक में यह मुद्दा उठा था, जिस पर मंत्री ने जिला अस्पताल प्रबंधन को बेड बढ़ाने का निर्देश दिया था। वहीं इसके बाद दुबारा आयोजित बैठक में यह मुद्दा उठा था। उधर, वेटिंग के चलते बीते तीन महीने से जिला अस्पताल में पहुंचने वाले किडनी के मरीजों को डायलिसिस की सुविधा समय से नहीं मिल पा रही है। डायलिसिस यूनिट में जनपद के साथ पड़ाेस के गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और बलिया से भी मरीज आकर डायलिसिस करा रहे हैं।
पंजीकरण के बाद हाेती है डायलिसिस
मरीज को डायलिसिस के लिए किसी किडनी के डॉक्टर का रेफर पर्चा अनिवार्य होता है। जिस पर चिकित्सक के डायलिसिस कराने का परामर्श होता है। चिकित्सक की सलाह के बाद मरीज का सेंटर पर पंजीकरण होता है। मरीज को आधार कार्ड के साथ दो फोटो लाना अनिवार्य है।
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