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Mau News: शुगर और एनीमिया से सात फीसदी महिलाओं में हो रहा है गर्भपात

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जिला महिला अस्पताल में मरीज को देखतीं महिला चिकित्सक।संवाद
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मऊ। पांच छह महीने तक सब ठीक होने के बाद गर्भवती महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और गर्भपात होने के मामलों में जांच के दौरान शुगर अनियंत्रित होना मिला है। बीते एक साल में महिलाओं में गर्भपात के सात फीसदी मामले बढ़े हैं। इसका कारण शुगर और एनीमिया है। बीते साल में महिला अस्पताल में करीब 150 से अधिक ऐसे में मामले पहुंचे हैं।
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इसमें जांच के दौरान अनियंत्रित शुगर को इसका मुख्य कारण माना गया हैं। इसमें 70 फीसदी महिलाओं को शुगर होने की जानकारी भी नहीं थी। अस्पताल के आंकड़े देखे तो गर्भपात के बीते दिसंबर में 11, नवंबर माह 9 मामले आए। जबकि जनवरी से अब कुल 150 महिलाओं में गर्भपात की समस्या लेकर अस्पताल पहुंची थीं, जिसमें जांच में वह शुगर की मरीज मिलीं।
महिला अस्पताल की महिला विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रा सिन्हा के अनुसार ओवरवेट महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है। पारिवारिक इतिहास होने पर शुरुआत में अन्यथा चौथे माह पर शुगर संबंधी सभी जांचें करानी चाहिए।
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गर्भ के दाैरान हार्मोन्स में बदलाव के कारण 24 से 27 सप्ताह में शुगर हो सकता है, यह आम बात है लेकिन शुरुआत से ही शुगर के लक्षण हैं तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान पहले एंटीनेटल चेकअप के दौरान ब्लड शुगर का टेस्ट करवाना चाहिए। बताया कि गर्भपात की समस्या से बचने के लिए सामान्य जांच के अलावा डॉक्टर एचबीएवन-सी जांच कराने चाहिए। इससे मरीज में तीन माह का शुगर का इतिहास सामने आ जाता है। खाली पेट सामान्य व्यक्ति का शुगर लेवल 70 से 100 तक होना चाहिए।
बीते एक साल में महिलाओं में गर्भपात के सात फीसदी मामले बढ़े हैं। इसका कारण शुगर और एनीमिया है। पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक 2500 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की जांच में करीब सात फीसदी ऐसे मामले मिले। - डाॅ. निलेश श्रीवास्तव, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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