शरद पूर्णिमा पर सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर भवानीनंदन यतिजी महाराज ने जिले के अति पौराणिक वनदेवी धाम में मंगलवार को विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। लगभग एक घंटे तक किए गए पूजन अर्चन से पूरा धाम जयकारों से गूंज उठा।
महामंडलेश्वर द्वारा प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्रि में ग़ाजीपुर स्थित सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर नवरात्रि महोत्सव में आयोजित तमाम महायज्ञों की पूर्णाहुति के बाद मऊ स्थित वनदेवी धाम में शरद पूर्णिमा के दिन दर्शन पूजन का कार्यक्रम किया जाता है।
इसके तहत महामंडलेश्वर ने मां वनदेवी मंदिर में विधि विधान से पूजन अर्चन किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर भवानीनंदन यतिजी महाराज ने वनदेवी धाम के पौराणिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जगत जननी माता सीता के वन में प्रवास के कारण उन्हें वनदेवी कहा जाता रहा। माता सीता के स्वरूप के साक्षात दर्शन यहां प्राप्त होते हैं। वनदेवी धाम में दर्शन पूजन से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं, यह स्वयं का मेरा अनुभव है।
उन्होंने कहा की अतिपौराणिक स्थल जहां माता सीता के निवास का साक्षात प्रमाण हो, उस माता के मंदिर भवन की दीनहीन दशा क्षेत्र व नगर के सम्मानित नगर वासियों के धार्मिक सहभागिता की भूमिका पर सोचने को मजबूर करता है।
उन्होंने आह्वान किया की वर्तमान में शुरू हो चुके भव्य मंदिर भवन निर्माण में नगर के व्यवसायी, चिकित्सक, किसान व आमजन से संभ्रांतजन का नैतिक कर्तव्य बनता है कि गिट्टी, मिट्टी, ईट, बालू, सींक, सरिया, अर्थदान, श्रमदान जो भी संभव हो सहयोग कर पुण्य के भागी बने। इस दौरान ब्रह्मचारी रत्नाकर त्रिपाठी, सुनील, मौनी बाबा आश्रम के महंत सत्यानंद यति, स्वामी अभयानंद, आचार्य महेंद्र, चंदन पांडेय, अमिता दुबे, धीरेंद्र सिंह, श्रवण कुमार पांडेय, शिवप्रताप सिंह, संत सन्यासी व श्रद्धालु मौजूद रहे।